STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Abstract

3  

Mukesh Bissa

Abstract

अजीब लगता है

अजीब लगता है

1 min
378

फरेब धोखा बताने में अजीब लगता है

सच के करीब जाने में अजीब लगता है


 अलग रहूं ये मुझको नहीं गवारा

 संगम कराने में अजीब लगता है


 खुद ही ठुकराया था मैंने इक दिन

 पास बुलाने में अजीब लगता है


मेरी कुछ बात वो मेरी मानेगा नहीं

दिल को निभाने में अजीब लगता है


टूट गया है उनसे रिश्ता ये भी 

खुद को बताने में अजीब लगता है


 ये वादें तोड़ नहीं मैं सकता 

 वादें करने में अजीब लगता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract