STORYMIRROR

Brijlala Rohanअन्वेषी

Action Inspirational

3  

Brijlala Rohanअन्वेषी

Action Inspirational

ऐसे ही नहीं विराट बनता है!

ऐसे ही नहीं विराट बनता है!

1 min
189

ऐसे ही नहीं कोई विराट बनता है !

तपता है वह, जलता है वह।

अग्नि की ज्वाला में तपकर 

पिघलता है, निकलता है।

लोहे के सांचे में ढलकर आकार खुद में बदलता है, 

ऐसे ही नहीं कोई विराट बनता है।

जीवन के हर उथल-पुथल में खड़ा खुद को रखने का साहस उर में रखता है ,

आलोचनाओं की जद्द में रहने के बावजूद भी चमक अपनी बिखेरता है ।

विरोधियों की वाक्-वार की गहराई को अपने बल्ले से जवाब भरता है।

नये नित्य कीर्तिमान रचकर खुद में नवरस भरता है।

ऐसे ही नहीं कोई विराट बनता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action