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Shruti Sharma

Tragedy Inspirational

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Shruti Sharma

Tragedy Inspirational

ऐ उम्र

ऐ उम्र

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ऐ उम्र !

हर साल तू अपना रक्म बढ़ाता है।

एक नाजुक से कंधे पर

हजारों का बोझ दे जाता है।

खिलखिलाते मुस्कान को

जिम्मेदारियों के तले दबा जाता है।

हर रात की नींद को

कल की चिंता थमा जाता है।

नन्हे से हाथों पर

सिक्कों का भार दे जाता है।

थोड़ा तो थम जा,

ऐ उम्र।

लड़कपन अब भी बाकी है ज़रा

क्यू इन मासूमों को तू उम्र तले दबा जाता है....



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