थोड़ा और जी लूं...
थोड़ा और जी लूं...
बेचैन है दिल
क्या भाग जाऊं कही
या समझा लूं खुद को थोड़ा
थक चुकी हूँ मैं
क्या मान लूं हार अभी
या सिख लूँ कुछ नया
निराश हूं मैं खुद से
क्या हो जाऊं मैं खुद से खफा
या मना लूं खुद को थोड़ा
बेबसी है थोड़ी सी
क्या छोड़ दूं खुद को अकेला
या थाम लूं हाथ खुद का
बंजर है उम्मीद
क्या मुरझा जाऊं मैं
या बो दूँ बीज हरा
शाम अभी ढला नहीं
क्या खो जाऊं इन रातों में
या आने दूँ एक और सवेरा नया
जीवन है ये मेरा
क्या सुनूं मैं सबकी
या हो जाऊं मतलबी थोड़ा
और जी लूं खुद के लिए थोड़ा...
