STORYMIRROR

अगर मैं सबसे बेहतर हो गया हूँ

अगर मैं सबसे बेहतर हो गया हूँ

1 min
27K


अगर मैं सबसे बेहतर हो गया हूँ
यक़ीनन फिर मैं पत्थर हो गया हूँ

न ही चीखें न आँसू हैं निकलते
मैं ग़म का इक समुन्दर हो गया हूँ

छुपाऊँ पैर तो मुँह छुप न पाए
किसी मुफ़लिस की चादर हो गया हूँ

वो इक मिसरे के दम पर कह रहा है
लो सुन लो, मैं सुख़नवर हो गया हूँ

सहेजे हूँ हज़ारों ज़ख्म दिल पर
किसी ज़ालिम का बिस्तर हो गया हूँ

मुझे रद्दी मुआफ़िक बेच डालो
ज़रूरत से भी कमतर हो गया हूँ

मैं किस बुनियाद पर रक्खूँ चिराग़ अब
मैं ख़ुद ही फूँस छप्पर हो गया हूँ...!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy