STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Romance Fantasy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Romance Fantasy

जासूसी

जासूसी

1 min
282

जब से हम प्रतिलिपि पर लिखने लगे 

श्रीमती जी को बहुत खटकने लगे 

इश्क मुहब्बत वाले गीत गजल मुक्तक 

और हसीन फोटो से वे उबलने लगे 

एक दिन स्टारमेकर पर गाते देख लिया 

किसी स्वर कोकिला से सुर मिलाते देख लिया 

तब से वो हम पर निगाह रखने लगे 

चुपके चुपके मोबाइल चैक करने लगे 

उनकी हरकतों पे हमें हंसी आ रही थी 

पर उनकी जान हलक में फंसी जा रही थी 

उनकी जासूसी उनके कोई काम नहीं आई 

क्योंकि जैसा वो सोच रही थी वैसा था नहीं, भाई 

हर औरत अपने आप में जासूस होती है 

कुछ बहुत भोली कुछ "खडूस" होती हैं 

पुलिस से ज्यादा खौफ बीवी का होता है 

संभल के रहना, हर घर में जासूस होता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy