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Bal Krishna Mishra

Romance Classics

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Bal Krishna Mishra

Romance Classics

|| अधूरे चाँद जैसा इश्क़ ||

|| अधूरे चाँद जैसा इश्क़ ||

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 सूनी डगर पे मैं तेरा नाम लेता रहा 

हाँ... नाम लेता रहा...

तू ग़ैरों की महफ़िल में, मैं तन्हाई सहता रहा

बेवफ़ा... तन्हाई सहता रहा |


तड़पता छोड़ के मुझको, तेरा कारवाँ चल दिया

अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया

अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया |


मिले न मौत मुकम्मल, न चैन पूरा आया

कफ़न मिला न मुझको, न तेरा साया आया |


ज़िंदा जला दिया मुझे तेरी बेरुख़ी ने इस क़दर

कि मेरी राख से भी बस, तेरी ही वफ़ा का धुआँ आया |


तू मुकम्मल कहानी किसी और की बन गई

मैं अधूरा सा अफ़साना तेरा रह गया |


तेरी डोली उठी तो मेरा जनाज़ा भी सज गया

तू हँस के रुख़्सत हुई , मेरा ख़ुदा भी रो दिया |


तड़पता छोड़ के मुझको, तेरा कारवाँ चल दिया...

अधूरे चाँद जैसा, मेरा इश्क़ रह गया...


 ~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |

                 मोबाइल : 8700462852.

                E-mail:    bk10mishra@gmail.com


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