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Bal Krishna Mishra

Inspirational

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Bal Krishna Mishra

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श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति - 3  

श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति - 3  

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🔱 श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति 🔱

जयति महाशक्ति स्वरूपा, शिव-हृदय-विहारिणी,

प्रलय-काल-नृत्यातुरा, दनुज-वंश-विदारिणी।

डमरू-ध्वनि-संग थिरकती, चरण-चाप-कंपित-धरा,

त्रिलोकी-वंदिता माता, आदि-शक्ति करुणामयी, जगदुद्धरा।


रण-चंडी रूप धरे, नयन-अग्नि झलकावती,

मुंडमाल कंठ सोहे, खड्ग-हस्त चमकावती।

तांडव-लय-बद्ध पग, घुँघरू रुनझुन बाजत,

भक्त-रक्षण-हेतु माँ, विकराल रूप साजत।


सौम्य रूप गौरी तुम, तुम्हीं महाकाली विकट,

शरण आए भक्त के, संकट हरतीं तुम तुरंत।

सृष्टि-स्थिति-विनाश की, तुम्हीं आद्या मूल हो,

नमन तुमको जगदंबे, तुम ही सिद्धि-अनुकूल हो।


हुंकार उग्र प्रचंड माते! शत्रु-दल थर-थर काँपता,

तेज ओजस्वी देख तेरा, काल भी पग नापता।

अरि-कंठ-विदारण खड्ग चमके, असुर-मस्तक डोलते,

जो बढ़े सुत की ओर कुदृष्टि, प्राण उसके बोलते।


परम पावन सौम्य गौरी! अंचल में अमृत धार है,

'बाल कृष्ण' की पुकार पर, बहती करुणा अपार है।

ऋद्धि-सिद्धि नव-निधि दे, मिटातीं सब क्लेश को,

शीश नवाए 'मिश्रा' माँ! हर लो सकल द्वेष को।


॥ इति श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति सम्पूर्णम् ॥

~बाल कृष्ण मिश्रा , नई दिल्ली |


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