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Kunwar Singh

Abstract

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Kunwar Singh

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अधूरा

अधूरा

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रात भी अधूरी है

दिन भी अधूरा है

फूल भी अधूरा है

काटें भी अधूरे है

पत्ता भी अधूरा है

नदी भी अधूरी है

पानी भी अधूरा है

बादल भी अधूरा है

बारिश भी अधूरी है

हवा भी अधूरा है

तूफ़ान भी अधूरा है

शांत भी अधूरा है

गुस्सा भी अधूरा है

शोर भी अधूरा है

कागज भी अधूरा है

कलम भी अधूरा है

शब्द भी अधूरा है

प्यार भी अधूरा है 

नफ़रत भी अधूरा है

आँसू भी अधूरा है

मुस्कान भी अधूरा है

तुम भी अधूरे हो

मैं भी अधूरा हूँ

अकेले में सब कुछ अधूरा ही तो है!



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