STORYMIRROR

ashok kumar bhatnagar

Inspirational Thriller

4  

ashok kumar bhatnagar

Inspirational Thriller

अडिग शिखर

अडिग शिखर

1 min
233


जब तुम दुर्गम राहों को पार कर लोगे,

जब नुकीले पत्थरों पर नंगे पाँव चलते हुए

तुम्हारे पैरों में पड़े छाले भी तुम्हें रोक न पाएँगे,

जब हर बाधा को अपनी इच्छाशक्ति से

तुमने धूल चटा दी होगी,

तब तुम समझोगे—

संघर्ष केवल बाधा नहीं, एक साधना है,

जो तुम्हें पहले से अधिक मजबूत बनाती है।

जब तुम ऊँचे पर्वतों का सीना चीर दोगे,

जब तुम्हारी साँसें थककर भी

हौसले का गीत गाने लगेंगी,

जब तुम्हारी आँखें मंज़िल से मिलने की

आतुरता में और अधिक चमकने लगेंगी,

तब तुम जानोगे—

कोई अंतर नहीं तुममें और उन चट्टानों में,

जिन्हें तुमने शिखरों को भेद कर जीता है।

जब तूफान भी तुम्हें हिला न सकेगा,

जब ठंडी हवाएँ तुम्हारा साहस न तोड़ सकेंगी,

जब विपरीत परिस्थितियाँ भी तुम्हारे संकल्प को

ज़रा भी डिगा न पाएँगी,

तब तुम समझोगे—

सच्ची विजय वही होती है,

जो मन के भीतर अर्जित होती है।

जब दुनिया सफलता और असफलता के तराजू में

तुम्हें तौलने लगेगी,

जब कुछ लोग तुम्हारी जयकार करेंगे,

और कुछ लोग तुम्हारी आलोचना,

तब तुम जानोगे—

कोई वास्तविक अंतर नहीं जीतने और हारने में,

कोई वास्तविक अंतर नहीं खोने और पाने में।

क्योंकि सच्ची विजय वही है,

जो तुम्हें अडिग बना दे,

जो तुम्हें अपने सत्य और संकल्प से जोड़ दे।

जब तुम शिखर पर खड़े होकर

अपने भीतर की शांति को महसूस करोगे,

तब तुम्हें ज्ञात होगा—

सबसे ऊँचा शिखर तुम्हारे भीतर ही था,

जिसे तुमने अपनी आत्मशक्ति से जीत लिया।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational