STORYMIRROR

Nirupa Kumari

Abstract

4  

Nirupa Kumari

Abstract

अभिज्ञान

अभिज्ञान

1 min
198

नहीं मैं किसी प्रियतम की प्रियसी

ना हूं मैं किसी की सखी

नहीं हूं धरती सी संभली

ना हूं कोई महान जननी

ना अबला हूं ना ही सबला हूं


किसी पैमाने में मत ढालो मुझे

इतने सवालों में मत बांधो मुझे

मुझे किसी भी तराज़ू में नहीं तुलना है

मुझे बस उन्मुक्त हो ,

अपनी मनचाही उड़ान उड़ना है


मैं हवा हूं,पानी हूं

समय हूं

मैं,एक अनकही कहानी हूं

जो रोके ना रुकी है

थामे ना थमी है


मुझे किसी रिश्ते नाते में नहीं बंधना है

संसार के तरह से नहीं सजना है

मेरी ना किसी से कोई तुलना है

मुझे ये ज़िन्दगी का सफर 

अपने ही हिसाब से तय करना है


स्वयं की खोज़ में ईश्वर तक पहुंचना है

प्रभु की रचना को

अपनी तरह से रचना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract