Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

swati sourabh

Inspirational Others

4.0  

swati sourabh

Inspirational Others

अब तुम्हारी बारी है

अब तुम्हारी बारी है

1 min
256


इज़्ज़त दो केवल उसी को, जो इज़्ज़त के काबिल है,

बता दो उनको उनका दायरा, जो रिश्तों का कातिल है।


झुका दो उन नज़रों को, जो घूरते तेरी ओर हैं,

जगह दिखा दो उन्हें उनकी, जो समझते तुझे कमजोर हैं।


मसल दो अपनी जुती से, जिनकी सोच इतनी नीच है,

जो भेड़िए की खाल ओढ़े, दिखता महान सबके बीच है।


समाज उसी पर हँसता है, जो इंसान कमजोर उसे लगता है,

दौलतमंद और दबंगों का तो, चाटुकार बना ये फिरता है।


डर है तुझे किस बात का,उम्मीद है किसके साथ का,

अरे जिस इंसान की मर्यादा ही मर चुकी,

अब वो सजा भुगतेगा अपने जघन्य पाप का।


अपने अधिकार व अस्तित्व के रक्षा की बारी है,

बन्दिशों को तोड़कर,अब उड़ने की बारी है।

सहनशक्ति को छोड़कर तलवार उठाने की बारी है,

अब अपने शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की बारी है।


उठो बेटी बहुत सह लिया, अब जवाब देने की बारी है,

मत भूल सामने खड़े दरिंदे को भी, जन्म देने वाली एक नारी है।


    



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational