अब मैं
अब मैं
शरीर भी अब साथ नहीं देता
मैं अब बूढ़ी होने लगी हूँ
पता नही चलता है पर अब
अंदर से कमजोर सी होने लगी हूँ।
मन की किताब के पन्ने खोले तो
पढ़ते पढ़ते ही सोने लग गई हूँ
शायद सब सही कहने लगे है
अब मै बूढ़ी होने लगी हूँ।
पहले सी फुर्ती कहाँ अब शरीर में
कुछ ही चलने पर थकने लगी हूँ
सांस भी अब लंबी लंबी सी
खींच खींच के लेने लग गई हूँ।
आंखों से भी दिखना कम हो चला हैं
औऱ सुनने भी ऊंचा सा लग गई हूँ
भूख भी अब कम सी हो चली हैं
जीने लायक ही खाये जा रही हूँ।
सब अपने मेंंरे साथ हो बस
यही कामना करने लगी हूँ
कब कौन सी सांस आखिरी हो
बस ये ही सोचने लग गई हूँ।
'मंजु अब बूढ़ी होने लगी हैं।'
