STORYMIRROR

DR. RICHA SHARMA

Inspirational

4  

DR. RICHA SHARMA

Inspirational

आत्ममंथन

आत्ममंथन

1 min
783

आत्ममंथन से ही हम खुद को जान पाते हैं। 

सकारात्मक ऊर्जा भीतर अपने भर पाते हैं।। 

आत्मबल के आधार पर ही जग जीत पाते हैं। 

तब हम इस संसार से प्रशंसा खूब पाते हैं।। 


आत्ममंथन हर इंसान के लिए बहुत जरूरी है। 

निस्वार्थ भावना से सेवा करना बहुत जरूरी है।। 

दयावान संग ईमानदार बनना बहुत जरूरी है। 

आत्मबलिदान करना सच में बहुत जरूरी है।। 


आत्ममंथन से ही हमें चुप्पी साधना आता है। 

नहीं तो बेचैन मन बेवज़ह बहुत इतराता है।। 

आत्मबलि चुनौतियों को स्वीकार करता है। 

आत्मप्रेम खुद से तथा अन्य से स्नेह करता है।। 


आत्ममंथन से ही हम सुख-दुख में एकसम रहते हैं। 

हानि-लाभ की परवाह न कर गंगा समान बहते हैं।। 

हँसते-मुस्कुराते हुए ही हरदम खुशी-गम सहते हैं। 

सभी आत्ममंथन कीजिए अंत में बस यही कहते हैं।। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational