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chandraprabha kumar

Inspirational

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chandraprabha kumar

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आत्मानुभव

आत्मानुभव

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अभ्यास और विचार की पराकाष्ठा पर

उदय होता है आत्मानुभव का,

वह अनुभव है एक विचित्र अनुभव 

वर्णन करना कठिन है जिसका। 


उसको वही जानता है 

जिसको वह अनुभव होता है 

फिर भी कुछ लक्षण हैं

आत्मा अनुभव के उदय होने के ।


जैसे रीठे का बीज पानी में डालने से

पानी अत्यधिक निर्मल हो जाता ,

वैसे ही आत्म ज्ञान के प्रभाव से

ज्ञानी का स्वभाव शुद्ध बुद्ध हो जाता ।


जैसे चूहे द्वारा पक्षियों के जाल कट जाते

वैराग्य से वासनाओं के जाल कट जाते,

हृदय की ग्रन्थियॉं ढीली हो खुल जातीं

भीतर आत्म- प्रकाश का अनुभव होता ।


जैसे पिंजरे से पंछी बाहर निकल भागता 

राग रहित मन मोह से बाहर निकल जाता ,

जैसे हवा बंद होने पर समुद्र शांत होता 

मन शान्त हो पूर्णचन्द्र सम सुशोभित होता।


ज्ञानी का मन समता का अनुभव करता 

जिससे उत्तम सौंदर्य का उत्पादन होता ,

जैसे सूर्योदय पर रात्रि क्षीण हो जाती 

वैसे ही ज्ञानी की वासना क्षीण हो जाती ।


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