आत्मा परमात्मा
आत्मा परमात्मा
हमारे जीवन में एक परमात्मा,
संतान में बसी होती हर माँ की आत्मा।
सभी करें जीवनभर माँ का सम्मान,
माँ से ही तो है हम सब का स्वाभिमान अभिमान।
जीवनदात्री शक्ति रहे अजर अमर ,
माँ से ही लगता ईश्वर की है हम पर शुभ नजर।
माँ ही तो लाती है हमारे जीवन में हर बहार,
माँ ही हर संगीतमय स्वर से लगे सुंदर संसार।
जीवन की हर तपिश में शीतलता,
डाँट के वक्त भी रहती वह सरल।
प्रेम, वात्सल्य की है प्रतिमा,
बनाए रखें अपनी माँ की हर स्थिति में गरीमा।
हर परिस्थिति में माँ शान्तिधारी,
महाव्रती संतान के जीवन में उनसे ही सभी चित्रकारी।
अलभ्य चरित्र चरण हैं पावनकारी,
प्रत्यक्ष देवी को प्रसन्न रखें यही हमारी समझदारी ,जिम्मेदारी।
