STORYMIRROR

सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

Abstract

2  

सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

Abstract

आशा

आशा

1 min
344



जिंदगी के

इस

अकेले

अनजाने रास्ते पर

छोटे-छोटे

कदम बढ़ाते,

आगे बढ़ते जाओ।

कांटे मिलेंगे बार- बार

स्वीकार करो

इस आशा से,

कभी न कभी तो

फूल भी मिलेंगे।

मत सोचो

क्या पाया

क्या खोया

क्योंकि यह

परे है

अधिकार क्षेत्र से।

सत्य है

तो केवल

कर्म और आशा।




ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

धार

धार

1 min വായിക്കുക

सामना

सामना

1 min വായിക്കുക

पहली बार

पहली बार

1 min വായിക്കുക

कोई आया

कोई आया

1 min വായിക്കുക

व्यस्त

व्यस्त

1 min വായിക്കുക

न्याय

न्याय

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Abstract