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सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

Abstract

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सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

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आशा

आशा

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जिंदगी के

इस

अकेले

अनजाने रास्ते पर

छोटे-छोटे

कदम बढ़ाते,

आगे बढ़ते जाओ।

कांटे मिलेंगे बार- बार

स्वीकार करो

इस आशा से,

कभी न कभी तो

फूल भी मिलेंगे।

मत सोचो

क्या पाया

क्या खोया

क्योंकि यह

परे है

अधिकार क्षेत्र से।

सत्य है

तो केवल

कर्म और आशा।




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