STORYMIRROR

सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

Romance

3  

सत्येंद्र कुमार मिश्र शरत

Romance

रूठना मनाना

रूठना मनाना

1 min
575

कोई रूठता है 

कोई मनाता है

कम नहीं है

प्रेम

दोनों तरफ।


रूठना भी प्रेम है

मनाना भी प्रेम है

कुछ 

देर के लिए ही सही

आओ

भूल जाए

ये सारी दुनिया।


जहां ना रूठना हो 

ना मनाना

खो जाए 

हम

एक दूसरे में।


मिटा कर

अस्तित्व

अपना

साकार करें

अर्द्धनारीश्वर

की कल्पना।


      


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance