आओगे
आओगे
यूँ इस तरह रूह में समा आप जाओगे
जो आईने देखोगे ख़ुद नज़र हमें आओगे।
यूँ आओगे सामने वक्त ठहर-ठहर जायेगा
देखकर हमें फिर चैन कहाँ तुम पाओगे।
हैं सांसो की सरगम में धड़कन बनी रहे
ये धुन प्यार की तुम यूँ ही गुनगुनाओगे।
कोई क्यूँ गुजरता नहीं इन राह गुजारो से
किनारे दूर आते नज़र पर यूँ ही चलते चले जाओगे।
अभी जितना सम्भलकर ज़माने से चलते हो तुम
तो लगता है उतने ही क़दम फिसले डगमगाओगे ।
ये मुस्कान फ़ितरत मेरी गम छुपा लेती है
हो ज़रा सी दिल पर लगी चोट मगर तुम मुस्कुराओगे।
कहूँ कैसे के इस मन में तेरी ही आरजू है
"नीतू" फूल बन के चमन मेरा ही खिलखिलाओगे।
गिरह
मान लो दुनिया बड़ी ज़ालिम है हकीकत में
किसी का दिल दुखाओगे नहीं फिर चैन पाओगे।

