आओ फिर 'खुश' हो जाते हैं
आओ फिर 'खुश' हो जाते हैं
बिछुड़ गए वो जो अब कहाँ लौट कर आते हैं,
और हम भी कहाँ उनको कभी भूल पाते हैं ।।
वो नहीं हैं संग तो क्या हुआ जीना तो पड़ेगा,
दुनियां के मेले से दूर अकेले ही दिल लगाते हैं।।
यूं तो जिंदगी के सफर में हमसफ़र होना लाजमी है,
फिर रास्ते कितने भी कठिन हों पर कट ही जाते हैं।।
ज़ख्म कभी नही भरता जुदाई का फिर भी जी लेते हैं,
ये फूल भी देखो तो कांटों के संग मुस्कुराते जाते हैं।।
बहुत सताती हैं यादें उनकी ,आँखें नम कर जाती हैं,
कोई क्या जाने कि कैसे बिना उनके ये दिन बिताते हैं।
इस भीड़ में चलो फिर किसी अपने को खोज लाते हैं,
कुछ पल ही सही चलो हम भी फिर 'खुश' हो जाते हैं।
