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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Tragedy Classics

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Tragedy Classics

आँसू

आँसू

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जिंदगी को जब जब छू गए आँसू।

लव हिले बिना कुुुछ कह गए आँसू।।


जब जब कसम खाई उसने रुलाने की

दिल मिले बिना सब सह गए आँसू।।


तुम गए तो आँसू भी खो गए हैं कहीं ।

रो तो रहे हैं मगर जाने कहाँ गए आँसू।।


दूरी क्या बढ़ी याद बहुत दर्द देने लगी हैै।

अब तो सैलाब बन कर रह गए आँसू।।


उस पर इल्जाम तुम्हारा बेवफाई का

तब बिना कुछ कहे ही बह गए आँसू।।


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