STORYMIRROR

Rishab K.

Abstract

3  

Rishab K.

Abstract

आंखें

आंखें

1 min
139

कमबख्त कारीगर ने यूं तेरी आंखों को तैयार किया,

कुछ नशा, थोड़ा कशिश, और फिर जादू इनमें मिला दिया,

जिसने देखा जमाने में तुझको, बस वाह वाह किया,

मैनें देखा तो गदर मच गई, बर्क गिर गया, सांसे थम गई और में फना हो गया ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract