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Kawaljeet Gill

Inspirational


4.5  

Kawaljeet Gill

Inspirational


आखिर कब तक

आखिर कब तक

1 min 245 1 min 245

आज मन कुछ उदास उदास था कुछ तो डर सा था दिल के किसी खोने मे

नहीं पता था दूर कोई अपना मौत से लड़ते लड़ते ये जंग हार जाएगा


बरसो से हम बिछड़े हुए थे महीनों तक कोई खबर नही होती थी

फिर भी उससे मिलने की आस होती थी


कि कभी किसी मोड़ पर मिल जाएंगे एक दूजे से और खुश हो लेंगे

आज वो उमीद भी टूट गयी हर आस भी हमारी टूट गयी आया ये कैसा दौर


हर और महामारी ने हाहाकार है मचाई हुई जाने कितने घर उझड गए इसमे

कौन है इसका जिम्मेदार किसकी है ये गलती कोई तो दे जवाब इसका


घर मे बन्द रहरहकर पागलो सी हो गयी हालात सबकी

आखिर कब तक बंद रहे हम घर के अंदर


घर से बाहर निकलते ही मौत का खौफ़ छा जाता है

कि कहीं न मिल जाये राह में बीमारी


डर डर कर जीने की ये आदत हमको मरने पर है मजबूर कर रही

अपनो को खोने का डर हर पल दिल पर हो रहा है हावी


जाने कितने जाने पहचाने चेहरे हमसे हों रहे जुदा अब तो

और जाने कितने और जुदा होंगे ये डर अंदर ही अंदर जान ले रहा है ।


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