आजा शाम होने आई
आजा शाम होने आई
ए महामारी कहाँ से आई,
रखनी है हमें भलाई।
ए तो सबकी है लड़ाई,
फिर होगी शुभ सवारी।
दूःख में होती हैं सबको हैरानी,
याद आती है बाते पुरानी,
कोई दुःख में शामिल हों,
कोई हम से दूर हो।
ए बाात सही ना
ए महामारी कहाँ से आई।

