आग जलनी चाहिए
आग जलनी चाहिए
किनारे क्यों बैठा तू ,
अपना धीरज खोये I
निराशा के अंधकार से ही ,
आशा की रोशनी का जन्म होय I
संजो ले मन की पूरी शक्ति ,
मंज़िल मिले कभी न जो हो अधूरी भक्ती I
विस्तृत ऊपर गगन विशाल है ,
बंद तेरी मुठ्ठी मेँ तेरी किस्मत कमाल है I
वक्त भी तेरा होगा ,
दांव भी तेरा होगा I
इतिहास के पन्नों मेँ ,
नाम भी तेरा होगा I
गर होंसले तेरे बुलंद होंगे ,
मन में बस जीत के धुन होंगे I
ये सब तब होंगे ,
जब आँखों में लक्ष्य औ मन मेँ ,
जुनुन की चिंगारी जलेगी I
और जब तक न मिले लक्ष्य ,
ये चिंगारी आग बन जलनी चाहिए I
