आभार
आभार
चुप रहकर भी जो आवाज बुलंद कर सकता है
वो कवि और लेखक ही होता है
जो समाज बदल सकता है
अपनी कलम से स्वतंत्रता का इतिहास बदल डाला
कितने वीरों को जोश से भर डाला
हर युग में दिखाया है समाज को दर्पण
प्रेमचंद की कलम ने बूखूबी किया किसानों का चरित्र चित्रण
टैगोर की कविताओं ने भारत को दिलाया गौरव
जन-गण राष्ट्र गान बनाकर दिया सबको सम्मोहन
निराला,पंत प्रसाद सब का बडा उपकार
हिंदी साहित्य को दिया रचनाओं का अनुपम उपहार
कवि और लेखक दोनों जग के आधार
नमन करते हैं उनको और करते उनका गुणगान।
