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Uddipta Chaudhury

Inspirational

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Uddipta Chaudhury

Inspirational

२०४७ भारतवर्ष

२०४७ भारतवर्ष

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स्व अधीन ए फिर स्वाधीन,दो शब्द में चाहे कितना भी गहरी संपर्क क्यूं ना हो आखिर मतलब एक ही है,हर मायाजाल को तोड़कर,ऊंचाई पर स्थित चट्टान को तरह शक्त समर्थ इंसान जो अपने लिए जीते हैं ।


मान,अभिमान,रिश्ते ,नाते ,और हर बंधन से आजाद एक नया आसमान जिनपर राज करने की ख्वाहिश हम सब में है।


सन १९४७ जब भारत वर्ष को २०० साल के बाद अंग्रेजों से आजादी मिली थी,बना था एक स्वाधीन सरकार तब से लेकर आज तक हम खुद को स्वाधीन मानते हैं,पर सच्चाई तो किस और ही है,


न मंजूरी जब हद से बड़ जाए,जब गले की हर एक नस चीखती चिल्लाती हुई अपनी आवाज़ को दबाकर जीती रहे,


जब अंधेरी रात में,सुनी सड़क पर चलते हुए हर एक मां,बहन उन्ही देहेशात के साथ चलती है के वो घर आखिर सही सलामत पहुंच पाएगी न?


जब घर घर में ,हर परिवार में,हर एक शहर में हम सब बस इसी उम्मीद पर जीते हैं के अब जो सरकार आयेगा वो शायद उन्नति के लिए कोई नया उमंग के साथ इस भारत देश को बिस्व के दरबार में पहले स्थान पर लेकर जाएगा।


भुखमरी, जरा, रोग मुक्त जिंदगी होगा ,सब खुलकर जिएंगे,कोई अपराध नही होगा ए फिर कहा जाए तो सब कोई सब को अपना मानकर इस मातृ भूमि को इंसानियत के नई परिभाषा के साथ और एक नया इतिहास रचाएंगे ।


कर्म क्षेत्र की हर एक किरदार को अपनी आजादी मिलेंगी,हर एक को कोई भी अर्थ कस्ट नही उठाना परेगा।


२०४७ सन की भारत भूमि एक आजादी का एक नया रूप देखेगी जहा पर सब को बराबर समझा जायेगा,सब कोई अपने जिंदगी में जो भी करना चाहे वो कर सकेगा कोई भी रोक टोक के बिना ।


हजारों आवाज़ करोड़ों में बदल जाएगा,कोई भी पीरित बक्ति के पास हजारों के तेहनाद में मौजूद होगा स्व अधीन इंसान जो खुद के लिए खुद के बनाई हुई नियमो पर जी पायेगा तब जाके ए देश स्वाधीन कहे लायेगा ।


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