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Vimla Jain

Action Classics Inspirational

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Vimla Jain

Action Classics Inspirational

गांव की गलियों में बसा मन

गांव की गलियों में बसा मन

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गांव की गलियों में बसा। मेरा मन मैंने बचपन में कोई गांव नहीं देखा मगर गांव के बारे में मेरी बुआ जी बहुत सारी बातें करती थी। हमारा गांव, हमारी हवेली, और उसके बारे में बहुत सारी कहानियां सुनाई, तो मेरा मन हमेशा गली उन गलियों में घूमने का अपनी हवेली देखने का करता था। तो मेरे बाबू सा जब भी पोकरण जाने की बात करते तो, मेरी इच्छा होती थी कि मैं भी जाऊं। मगर मैं नहीं जा पाती। इसी तरह हम बड़े हुए शादी हो गई। वह हवेली हमारे पिताजी ने हम दोनों बहनों को दे दी।

उसके बाद एक बार में दीदी के साथ में पोकरण गई।

वहां की एक एक गली और अपनी हवेली सबको घूम घूम कर देखा। मन इतना खुश हो गया। उसको छू छू कर देखा। कहीं पर हाथ लगाया। ऐसा लगा टूटे हुए कमरे तक में जाकर देखा दीदी के ना बोलते तो भी मैं छत पर भी गई सब देख कर आई। ऐसा लगा कोई भव्य भूतकाल जी रहे हो वहां के लोग भी इतने अच्छे हैं इतना सहकार देने वाले हैं और सीधे सरल और सच्चे हैं।मेरा मन आज भी उन गलियों में भटक रहा है। उसके बाद में मैं एक दो बार और भी गई हवेली पर। और उन गलियों में भी घूमी। आज तो पोकरण काफी अच्छा हो गया है। जब मैं गई थी तब तो गांव जैसा ही था ,और मेरा मन उन्हीं गलियों में भटक रहा था। बाद में वह हवेली पापा जी हम बहनों के नाम कर दी, तो हम लोगों का जाना एक-दो बार और भी हुआ। वहां जाने पर परिचितता का एहसास होता है ,ऐसा लगता है कि यह हमारा गांव है। पहली बार गए थे तब भी ऐसा लगता था। और अभी मैं घर में बैठ कर के भी वहां की एक एक गली के बारे में बता सकती हूं। मेरा मन आज भी पोकरण गांव की गलियों में बसा हुआ है। अब तो पोकरण ऐतिहासिक फलक पर आ गया है परमाणु परिक्षण के कारण मुझे मेरे गांव पर गर्व है।


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