वैलेंटाइन डे की कहानी
वैलेंटाइन डे की कहानी
हर प्रेमी जोड़ा वैलेंटाइन वीक का इंतजार पूरे साल बड़ी बेसब्री से करता है। इस खास वीक की शुरुआत गुलाब की खुशबू यानी रोज डे से होती है। कपल्स इस दिन को स्पेशल बनाने से लेकर प्रेमी को दिल का हाल बताने तक, गुलाब के फूलों और चॉकलेट का सहारा लेते हैं। रोज डे मनाने को लेकर कई किस्से बताए जाते हैं। अगर आप ROSE के अक्षरों को अलग तरीके से व्यवस्थित करते हैं तो यह बन जाता है 'EROS' जो प्रेम के देवता है। ग्रीक माइथोलॉजी के मुताबिक प्रेम की देवी Venus का भी गुलाब पसंदीदा फूल हैं। लेकिन संत वैलेंटाइन की कहानी प्यार करने वाले हर दिल के बेहद करीब है।
‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ किताब से
वैलेंटाइन का दिन रोम के एक संत वैलेंटाइन के नाम पर दुनिया भर में मनाया जाता है। रोम के सम्राट क्लाउडियस के शासन के दौरान संत वैलेंटाइन दुनिया भर में प्यार को बढ़ते हुए देखना चाहते थे लेकिन उनकी राजा को बिल्कुल भी पसंद नहीं थी। क्लाउडियस को लगता था कि रोम के लोग अपनी पत्नी और परिवार के साथ मजबूत लगाव होने की वजह से सेना में भर्ती नहीं हो रहे हैं।
सैनिकों का ध्यान भंग हो जाता था, यह मानना था कि प्रेम या किसी के प्रति झुकाव के चलते सैनिकों का ध्यान भंग होता था और रोम के लोग सेना में भर्ती नहीं होना चाहते थे। ऐसे में क्लाउडियस के सैनिकों की शादी और सगाई पर पाबंदी लगा दी गई। संत वैलेंटाइन ने उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाकर विरोध जताया, संत वैलेंटाइन ने रोम के राजा के निर्णय के विरुद्ध जाकर शादियां भी कराईं। इस वजह से 14 फरवरी के दिन संत वैलेंटाइन को फांसी पर चढ़ा दिया गया था। तब से संत वैलेंटाइन की याद में 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाने लगा।
