बेपनाह मुहब्बत और दीवानगी
बेपनाह मुहब्बत और दीवानगी
बेपनाह मुहब्बत और दीवानगी : एक सैनिक की अपनी मातृ भूमि के साथ और एक प्रेमिका की अपने सैनिक के साथ
कारगिल की चर्चा जब भी होती है एक नाम सबको याद आता है, वो नाम है कैप्टन विक्रम बत्रा का जो इस युद्ध के हीरो थे। भारत आज कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी जीत के 23 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा जब्त की गई कई पर्वत ऊंचाइयों को फिर से हासिल करने में शहीद नायकों के सर्वोच्च बलिदान और वीरता को इस दिन सलाम है। 26 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय का सफल हुआ। हर साल 26 जुलाई को देश भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कारगिल विजय दिवस की बात हो और कैप्टन विक्रम बत्रा, जिन्हें कारगिल का हीरो भी कहा जाता है, उनकी बात ना हो....ऐसा हो नहीं सकता।
विक्रम बत्रा जब करगिल युद्ध पर निकले तो उन्होंने अपनी प्रेमिका से कहा था कि ''या तो तिरंगा फहराकर आऊंगा या उसी में लिपटकर, लेकिन आऊंगा जरूर।" कारगिल के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी भी कुछ ऐसी है जो किसी के भी दिल में देश भक्ति के जज़्बे को पैदा करने की ताक़त रखती है। वो एक ऐसे सैन्य अधिकारी थे, जिन्होंने 24 साल के उम्र में ही देश के लिए शहादत दी। वे 1999 में कारगिल में पाक के खिलाफ युद्ध में शहीद हुए थे। कैप्टन बत्रा वो थे, जिन्होंने कारगिल के 5 बेहद महत्वपूर्ण प्वॉइन्ट्स पर भारत का तिरंगा लहराने में अहम भूमिका निभाई थी। कारगिल युद्ध में दिखाए असाधारण शौर्य और पराक्रम के लिए कैप्टन बत्रा को मरणोपरांत भारतीय सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के पास घुग्गर गांव में 9 सितंबर 1974 को जन्मे कैप्टन विक्रम बत्रा मिडिल क्लास परिवार से संबंध रखते थे। वह अपने सहपाठियों और शिक्षकों के बीच बेहद लोकप्रिय थे और स्कूल में एक ऑलराउंडर थे। उन्हें बचपन से ही खेल-कूद और स्कूल के अन्य गतिविधियों में भाग लेना पसंद था। कैप्टन विक्रम कराटे में ग्रीन बेल्ट धारक थे और राष्ट्रीय स्तर पर टेबल टेनिस खेलते थे।
कैप्टन विक्रम बत्रा बचपन से ही देशभक्त थे और हमेशा सेना में भर्ती होने के इच्छुक थे। उन्होंने 1995 में स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। 1996 में, उनका सपना तब पूरा हुआ जब इसके बाद जब इंडियन आर्मी एकेडमी में उनका चयन हुआ तो वे चले गए।उन्होंने सीडीएस परीक्षा पास की और भारतीय सैन्य अकादमी में शामिल हो गए जहां उन्हें लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया गया था। विक्रम बत्रा को उत्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट (एयर विंग) से सम्मानित किया गया था।
साल 1995 में डिंपल पहली बार विक्रम बत्रा से पंजाब यूनिवर्सिटी में मिली थीं। यह उनकी कहानी की शुरुआत के दिन थे। दोनों ने एमए इंग्लिश में एडमिशन लिया था। लेकिन दोनों ही इस डिग्री में पास नहीं हो सकें। डिंपल इसे भी अपना नसीब मानती हैं। उन्होंने कहा था कि इसी वजह से वे साथ रहे और ज्यादा करीब आए।
डिंपल चीमा” शहीद कैप्टन बत्रा की मंगेतर है जो की कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे । कैप्टन विक्रम के जाने के बाद डिम्पल जी ने कभी विवाह नहीं करने का फैसला किया ।वैसे तो डिम्पल जी 4 साल से विक्रम को डेट कर रही थी कॉलेज में वो एक साथ, एक ही क्लासरूम से पढ़ते थे फिर उन्होंने शादी करने का फैसला किया ओर फिर उन्होंने तय किया की जब विक्रम कारगिल से आ जाएगा फिर वो लोग शादी कर लेंगे।
लेकिन विक्रम कारगिल में वीरगति को प्राप्त हो गया फिर डिम्पल जी ने आजीवन विधवा रहने का फैसला किया। कहा जाता है कि पाकिस्तान की सेना से 'शेरशाह' का टाइटल हासिल करने वाले और 'ये दिल मांगे मोर' को मशहूर करने वाले कैप्टन बत्रा का पहला प्यार अगर फौज थी तो उनका दूसरा प्यार डिंपल चीमा थीं।
डिंपल ने कभी शादी नहीं की और विक्रम बत्रा की विधवा बनकर जीने का फैसला किया। डिंपल के शब्दों में , 'पिछले 23 सालों में एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ जब मैंने खुद को उससे अलग महसूस किया हो। ऐसा लगता है कि वह किसी पोस्टिंग पर दूर हैं। मैं अपने दिल में जानती हूं कि हम फिर से मिलने जा रहे हैं, बस समय की बात है। जब लोग विक्रम की उपलब्धियों के बारे में बात करते हैं तो मुझे बहुत गर्व होता है। लेकिन दिल के कोने में अफसोस भी होता है कि उन्हें यहां होना चाहिए था। अपनी वीरतापूर्ण कहानियां को सुनना चाहिए था। कैसे आज वो युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।'
एक बार दोनों मनसा देवी और गुरूद्वारा श्रीनंदा साहिब के दर्शन के लिए गए थे। इस दौरान जब डिंपल ने शादी की बात की तो कैप्टन बत्रा ने बिना कुछ सोचे समझे ब्लेड से हाथ का अगूंठा काटा और खून से डिंपल की मांग भर दी थी। मुलाकात के बाद दोनों भले ही चार साल साथ रहे, लेकिन डिंपल आज भी कैप्टन बत्रा की यादों को दिल में संजोए हुए हैं।
डिंपल कहती है कि 'कैप्टन बत्रा के साथ उनका साथ भले ही चार सालों का रहा हो, लेकिन यादें जिंदगी काटने के लिए काफी हैं। वो बताती हैं कि दो दशक गुजर गए, मैने कभी भी अपने आप को उससे अलग नहीं पाया
डिंपल अभी भी विक्रम की यादों के साथ रहती हैं और इंतजार करती हैं विक्रम का। वो कहती हैं, मुझे भरोसा है कि वो वक्त आएगा, जब हम फिर मिलेंगे, एक होंगे’ इन पांच सालों में कुछ ही वक्त डिंपल और विक्रम साथ में रहे।
लेकिन विक्रम ने जहां देश की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराकर देश का सिर ऊंचा किया, वहीं डिंपल ने अपने प्यार को अमर कर दिया। डिंपल ने उसी दिन कसम खा ली कि वो ताउम्र विक्रम की यादों के सहारे अपनी जिंदगी गुजार देगी, लेकिन विक्रम के अलावा किसी और का नाम अपने साथ नहीं जोड़ेगीं। डिंपल आज भी विक्रम के प्यार के सहारे जिंदा है।
एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में डिंपल ने बताया था कि –गुजरे 20 सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं था, जब मैंने खुद को तुमसे अलग पाया हो। मुझे हमेशा लगता है जैसे तुम किसी पोस्टिंग पर मुझसे दूर गए हो।
