गोलियां लगने के बाद भी लड़ते रहे, जानिए कारगिल युद्ध के हीरो कौन थे?
गोलियां लगने के बाद भी लड़ते रहे, जानिए कारगिल युद्ध के हीरो कौन थे?
कैप्टन विक्रम बत्रा कैप्टन विक्रम बत्रा वही हैं, जिन्होंने कारगिल के प्वांइट 4875 पर तिरंगा फहराते हुए कहा था “यह दिल मांगे मोर।” विक्रम 13वीं जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में थे। विक्रम तोलोलिंग पर पाकिस्तानियों द्वारा बनाए गए बंकर पर न केवल कब्जा किया बल्कि गोलियों की परवाह किए बिना ही अपने सैनिकों को बचाने के लिए 7 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों को सीधे भिड़ गए। आज उस चोटी को बत्रा टॉप से जाना जाता है। सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र देकर सम्मानित किया।
कैप्टन मनोज कुमार पांडे शहीद मनोज गोरखा राइफल्स के फर्स्ट बटालियन में थे। वह ऑपरेशन विजय के महानायक थे। उन्होंने 11 जून को बटालिक सेक्टर में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। वहीं उनके ही नेतृत्व में सेना की टुकड़ी ने जॉबर टॉप और खालुबर टॉप पर सेना ने वापस कब्जा किया था। पांडेय ने अपनी चोटों की परवाह किए बिना तिरंगा लहराया और परमवीर चक्र से सम्मानित किए गए।
राइफल मैन संजय कुमार शहीद संजय 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स में थे। वह स्काउट टीम के लीडर थे और उन्होंने फ्लैट टॉप को अपनी छोटी टुकड़ी के साथ कब्जा किया। वह एक जांबाज योद्धा थे उन्होंने दुश्मनों की गोली सीने पर खाई थी। गोली लगने के बाद भी वह दुश्मनों से लड़ते रहे और उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया।
मेजर पदमपानी आचार्य शहीद आचार्य राजपूताना राइफल्स की बटालियन में थे। 28 जून 1999 को लोन हिल्स पर दुश्मनों के हाथों वीरगति को प्राप्त हो गए थे। सरकार ने कारगिल हिल पर उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया था।
कैप्टन अनुज नैय्यर शहीद अनुज जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन में थे। 7 जुलाई 1999 को वह टाइगर हिल पर दुश्मनों से लड़े। कैप्टन अनुज की वीरता को सरकार ने मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
कैप्टन एन केंगुर्सू शहीद केंगुर्सू राजपूताना राइफल्स के बटालियन में थे। वह कारगिल युद्ध के दौरान लोन हिल्स पर 28 जून 1999 को दुश्मनों को पटखनी देते हुए शहीद हो गए थे। युद्ध के मैदान में दुश्मनों को खदेड़ देने वाले इस योद्धा को सरकार ने मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया।
कारगिल युद्ध में शामिल होने वाले सभी जवानों के बारे में जितनी बात की जाए कम है। इन योद्धाओं के पराक्रम को बयान करने के लिए एक लेख काफी नहीं है।
बाजिया ने कारगिल युद्ध में गंवाया एक पैर
कारगिल सैनिक रामसहाय बाजिया ने कारगिल युद्ध के दौरान अपना एक पैर गवां दिया था। अपने बुलंद हौसलों के चलते वे सेना में रहते हुए वीरता पुरस्कारों से भी नवाजे गए। सेना में रहकर देश की सेवा करने के बाद बाजिया ने 2012 में सैनिकों के हित के लिए प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति के माध्यम से कार्य करना शुरू किया जो आज भी निरंतर जारी है।
