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Tripti Dhawan

Abstract

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Tripti Dhawan

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मेरी दुनियां है तुझमें कहीं

मेरी दुनियां है तुझमें कहीं

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असहाय, लाचार , इस संसार से जुड़े जब,

तब मईया सी पावन खिवईया मिली थी,

वो जीवन के आरम्भ से ही सब उसने सिखाया,

जीवन वाली नईया को चलाना बताया,


वो प्यार से बुलाना, वो चूड़ीयों को खनकाना,

वो तेरा गले से लगाने के लिए पास बुलाना,

माँ तेरी इस पुकार ने ही हमको पालने से

उठकर चलना सीखाया,

वो तरेा स्कूल ले जाना, होमवर्क कराना,

गलितयाँ बताना और सुधरवाना,


वो हर बात के लिए प्रेरणा देना,

वो संगीत की मधुर तान को सिखाना,

कभी डांट पड़ जाये तो दिल टूट सा जाता था,

हमको डांट के गला तेरा भर आता था,


वो प्यारी वाली झप्पी और मोटू माँ की किस्सी

इनसे तो हर गम भाग जाता था,

मेरे लडखडाते कदमों को तूने ही सहारा दिया,

हर चीज सिखायी अपने आचँल का साया दिया,

आज जो कुछ भी हूँ सब की नींव आपने भरी,

माँ मेरी दुनिया है तुझमें कहीं।।



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