Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
 ख्वाब
ख्वाब
★★★★★

© Medha Antani

Abstract

1 Minutes   1.1K    3


Content Ranking

 

कभी चाँदरातों में खुले आँगन  बैठे रहें
खामोश...और सुनते रहें
एहसासों को...
हवाओं को...
पीते रहें सितारों की झीलमील ...
और चाँदनी की रुपहरी रौशनी को...
या रातरानी के नीचे...
जिसकी महकी हुई सफेद कालिन पे
बीछे हुए से हम
बस ऐसे ही अलसाये..
कल ही ऐसा ख़्वाब देखा था
 ऑफिस से लौटते वक्त
चर्चगेट -वसई लोकल मे ...
रश अवर्समे जुलझते जरा सी
आंख लग गई थी...
फ्लैट खिडकी से आसमां नहीं दिखता,
लोकल की भीड़ में से बाहर चांद नहीं दिखता..
रातरानी के फूलों की पेंटिंग  मेरे
10'12" के कमरे में लगाई है...
पलंग के दोनों छौर पे..
मैं ...
कल सब के लिए टिफिन में
क्या बनाऊँ इस सोच में...
तुम.. 
कल सुबह फास्ट या बस
और फिर मैट्रो पकडोगे...
इस सोच में....
ख़ामोश  हैं तो बस
एहसास..चांदरात ..
हवा..सितारे..
और..
ख़्वाब ...

व्यस्त महानगर सोच ख्वाब

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..