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शब्बा खैर
शब्बा खैर
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© Vandana Sinha

Drama

1 Minutes   1.3K    8


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रात लेती है अंगड़ाई

और चाँद बादलों में छिपा

अक्सर लिख देता है

एक नई इठलाती महकती नज़्म...

शब्बा खैर


आज मौसम का मिजाज़

कुछ बदला - बदला - सा है

हवाएं कर रही हैैं सरगोशी

बादल भी कुछ अनमना - सा है

तेरी आँखो में है मदहोशी या

फिज़ाओं में इक नशा - सा है...।


चाँदनी ले रही है अंगड़ाई

चाँद भी बहका - बहका - सा है

थाम लो मुझको अपनी बांंहों में

नेह अम्बर से बरस रहा - सा है

तुमने आज ये क्या कह दिया

मेरा चेहरा झुका - झुका - सा है

धानी चुनर है या प्रीत का रंग

आज मन -मयूर सतरंगी - सा है...।


Night Love Nazm

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