महिला नहीं है किसी से कम
महिला नहीं है किसी से कम
महिला नहीं है किसी से कम,
किसी और में नहीं है इतना दम,
जो चुपचाप सह लेती है हर दुख और गम....
महिला कितनी सुंदर होती है,
कोई भी दुख हो तब भी वह नहीं रोती है,
हर एक चीज को समझ लेती है,
हर दुख को झेल लेती है,
महिला के रूप देखो..
मम्मी पापा के लिए बेटी बन जाती है,
बच्चे की मां कहलाती है,
स्कूल में बच्चों की टीचर बन जाती है,
पति के लिए धर्मपत्नी कहलाती है,
जितनी रूपों की बात करें,
वह कम पड़ जाते हैं,
जितनी तारीफ महिला की करें,
तब तो शब्द भी कम पड़ जाते हैं,
तब तो शब्द भी कम पड़ जाते हैं।
