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क्या मज़ाक है
क्या मज़ाक है
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© Hemant Singh

Drama

1 Minutes   6.5K    4


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मेरे दिल पर नश्तर से तराशी तस्वीर तुमने,

ज़फा की खुद ही और कहा कि हम हो गये आज़ाद,

क्या मज़ाक है !


मेरे चेहरे पर दुआ मेरी सलामती की,

पीछे मेरी बरबादी की फरियाद,

क्या मज़ाक है !


काट कर सब्ज़ दरख्तों को मुनाफे के लिये,

छाँव के वास्ते कर रहे दरख्वास्त,

क्या मज़ाक है !


मर्द होने का गुरूर तो सजा रक्खा है,

ज़ुल्म औरत पे हुआ तो कर गये बर्दाश्त,

क्या मज़ाक है !


दीन के नाम पर सियासत में खूँँ मिलाते हो,

और सियासत पर सितम ढाने का इल्ज़ाम,

क्या मज़ाक है !


मुल्क के वास्ते खूँ तो छोड़ो,

पसीना ना बहा,

पर नेमते मुल्क को लिखते हो अपने नाम,

क्या मज़ाक है !


तुम्हारे तंज़ में छुपे डर को पढ़ लिया है सिंह,

तुम्हारा आखरी तक डरने से इंकार,

क्या मज़ाक है !


हमने अपने गम को दे दी ज़रा - सी स्याही,

तुम मान बैठे कि हम हो गये फनकार,

क्या मज़ाक है !







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