STORYMIRROR

ज़माना

ज़माना

1 min
13.5K


वहशत ए ज़माने में कमाल का असर होता है,

इससे चेहरा तो हँसता है, दिल ज़ार ज़ार रोता है,

अनगिन आशिकों कों दफ्न कर चुका है, ज़माने का सितम,

है ये सुराख वो, जो इंसानियत का सफिना डुबोता है,


हर बदलाव को करता है सिरे से खारिज ,

जिनके साथ ताकत हो, ये उनके साथ होता.है,

पर जब कोई बाँध कर साफा, खड़ा होता है बली होने,

उसकी राहे मुबारक में पहले, काँटें लाख बोता है...।








विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama