STORYMIRROR

Javed Ali

Abstract

4  

Javed Ali

Abstract

नारी तुम विश्वास जगत का

नारी तुम विश्वास जगत का

1 min
681

नारी तुम विश्वास जगत का ,नारी तुम उत्थान हो

तुमसे ही संसार बना है, तुम ही इसका अभिमान हो

नारी तुम विश्वास जगत का , नारी तुम उत्थान हो

तुमसे ही संसार बना है, तुम ही इसका अभिमान हो

इस सृष्टि को मिला सहारा, नारी वाला रूप निराला

ममता ,प्रेम, करुणा, दया से तुमने यह संसार सजाया

तुमने ही तो खुशियां बांटी ,तुमने ही विषाद हराया

तुमने ही विश्वास जगाया ,तुमने ही सम्मान दिलाया

नारी तुम विश्वास जगत का ,नारी तुम उत्थान हो

तुमसे ही संसार बना है, तुम ही इसका अभिमान हो


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract