हसरत..
हसरत..
यार का नाम कभी हसरतों में ना छुपाओ
क्यूँकि हँसी हँसी में
कभी ये राज खुल ही जाता है
तुम लाख बहाने ढूंढ लेते हो छुपाने के
पर लफ्जों का तराना
मिल ही जाता है
तुम चाहे कहो ना कहो ये दिल का हाल
उस हसीन शाम में
एक हसीन पैमाना बन ही जाता है।

