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Mayank Kumar

Abstract

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Mayank Kumar

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हार कर बैठ गया हूं

हार कर बैठ गया हूं

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हार कर बैठ गया हूं उस घाट पर

जहां पर कभी तुमने साथ छोड़ा था


उस जगह अधूरी थी हमारी दास्तां

जिस जगह तुमने वो ख़्वाब छोड़ा था


कई बादल फिर से बेचैन हैं वहां पर

जहां पर तुमने उसका आकाश छोड़ा था।


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