वो दोनों खिलखिलाती हैं
वो दोनों खिलखिलाती हैं
" तुम उससे शादी कैसे कर सकते हो? "
" क्योंकि मैं उससे प्यार करता हूं, और अगर उसे कुछ नहीं आता है तो वो शादी के बाद सीख लेगी !"
माता पिता और बेटे का संक्षिप्त वार्तालाप, किंचित विरोध फिर बेटे की पसंद पर मुहर लग गई और प्रीता उस घर की दुल्हन बनकर आ गई ।
दरअसल...
अमन ने ज़ब प्रीता से शादी करने की इच्छा ज़ाहिर की तब घर में सब चौंक उठे। क्योंकि अनंत तो खाने पीने का बहुत शौक़ीन था। इधर दक्षिण भारतीय प्रीता को एक तो खाना बनाना नहीं आता था, ऊपर से उत्तर भारतीय व्यंजन तो उसे पसंद भी नहीं थे। तो बनाने का तो सवाल ही नहीं उठता।
"लेकिन बेटा! प्रीता को तो खाना बनाना नहीं आता। फिर कैसे...!"
माँ की बात पूरी होने से पहले ही अनंत बोल पड़ा,
"माँ! मैं प्रीता से प्यार करता हूँ और उससे शादी प्यार की वजह से करना चाहता हूँ ना कि इसलिए कि वह मुझे खाना बनाकर खिलाएगी इसलिए!"
घर में सब अनंत के इस जवाब से लाजवाब हो गए। और प्रीता ज़ब दुल्हन बनकर आई तो उसने अनंत के इसी अगाध प्यार की खातिर अपनी सास गायत्री जी से अनंत की पसंद का खाना बनाना सीखने लगी।
दोनों सास बहू मिलकर रसोई में कुछ भी पकाती तो उनके आपसी प्यार की मिठास से वह स्वादिष्ट बन जाती।
एक दिन प्रीता ने कहा कि,"मम्मी जी!आप मुझे कभी डांटते नहीं और
इतने प्यार से सिखाती हैं तो मुझे बहुत अच्छालगता है!"तो गायत्रीजी ने कहा कि,
" बेटा !मेरी सास इतनी अच्छी नहीं थी।वह मुझे बहुत डांटती थी।इसलिए मैंने सोचा था, कि मैं अपनी बहू को नहीं डाटूंगी।और तुम भूलना नहीं कि सास भी कभी बहू थी!"
" जी माँ जी नहीं भूलूंगी !"
प्रीत आने का फिर दोनों सास बहू की खिलखिलाहट से घर गुंजने लगा।
जिस घर में स्त्रियां हंसती खिलखिलाती हैं उस घर में खुशियां आकर ठहर जाती हैं।
