उम्र छोटी बात गहरी
उम्र छोटी बात गहरी
विशु उम्र में छोटा था मगर दिमाग से बहुत तेज। घर के सभी लोग उसे "क्वशचन बॉक्स" कहकर चिढ़ाते थे। वह बात कम करता सवाल ज्यादा करता। घरवालों द्वारा कई सवालों के जवाब दिए जाते,कई सवालों को टाल भी दिया जाता था।
कभी पूछता- आसमान लटका तो गिर क्यों न रहा ? इतनी बारिश का पानी बादलों में कहाँ इकट्ठा रहता है ? तारे सिर्फ चंदा मामा के साथ क्यों आते है , सूरज के साथ क्यों नहीं ? पानी पतला क्यों हैं पकड़ में क्यों न आता ? हवा महसूस होती पर दिखाई क्यों न देती ? आदि आदि।
एक दिन माँ ने उससे बातों बातों में कहा:--' "माँ बाप" इस धरती पर भगवान का रूप होते हैं। उनकी सेवा ही भगवान की सेवा है। उन्हें दुखी नहीं करना चाहिए नहीं तो भगवान भी नाराज हो जाते हैं।
विशु ने सब बहुत गंभीरता से सुना। उसकी माँ बहुत हैरान थी की आज विशु ने कोई सवाल क्यों नहीं किया।
तभी उसने माँ का हाथ पकड़ा और अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगा, कमरे में विशु ने अपने मम्मी पापा की तस्वीर रखी और नीचे दीवार पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा दिया "मेरे भगवान"।
माँ के चेहरे पर खुशी और आश्चर्य की मिश्रित चमक थी,
विशु :- माँ ! कुछ सवाल पूछूँ ? पापा अपने भगवान को दूर क्यों रखते हैं ? दादी की सेवा क्यों नहीं करते ? दादी हमसे दूर अपनी दोस्तों के बीच क्यों रहतीं है ? वो हमारे साथ क्यों नहीं रहतीं ? पापा अपनी माँ के बगैर कैसे रह लेते हैं ? मैं तो आप दोनों के बिना नहीं रह पाता हूँ। और आश्चर्य की बात की पापा के भगवान यानि दादी फिर भी पापा से नाराज नहीं होती , क्यों ?
आज विशु की माँ, न सवालों को टाल पा रही थी और न ही विशु को जवाब दे पा रही थी।
