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तुम

तुम

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फ़िज़ाएं भी बदलें तुम्हारे इशारे
घटाओं की स्याही का ख़त हो तुम 

बेमानी इन ज़ुल्फ़ों की साजिश है ये भी
कि रातें समेटे बैठे हो यूँ तुम 

गहरे इस काजल में छिप के तो बैठा है
मेरी निगाहों का नूर जो गुम 

तुम्हारी नज़र की नवाज़िश है ये भी
कि नश्तर चुभोते हौले ज़रा तुम 

सितारों की महफ़िल में चाँद दीवाना
तुम्हारी हँसी से हर मौसम तराना

तुम्हारे सुरों की सिफारिश है ये भी
हर गीत तो बुनते हैं तुम पर ही हम 


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