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Sonam Sharma

Tragedy Inspirational

4  

Sonam Sharma

Tragedy Inspirational

टूरिस्ट बस

टूरिस्ट बस

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डिसक्लेमर:

इस कहानी में दिखाई गई घटनाएँ और पात्र काल्पनिक हैं।

यह सामग्री केवल मनोरंजन एवं कहानी कहने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

किसी भी प्रकार के अपराध, विस्फोट या गैरकानूनी कृत्य का समर्थन या प्रोत्साहन नहीं किया जाता।



1 अक्टूबर, 2022,


शाम के 06 : 00 से 06:30 बजे के करीब ... दिल्ली महावीर ट्रेवल एजेंसी के पास...


सुनसान सड़क पर गिन-चुनी दो-चार गाड़ियाँ, एक-दो बसें और लगभग 10–15 लोग ही थे, जो दूर-दूर अपनी दुकानों में अपने कामों में व्यस्त थे। उस समय का माहौल बिल्कुल शांत दिखाई दे रहा था।


तभी एक लंबी कद-काठी वाली, गौर वर्ण की लड़की नीले रंग की सलवार-कमीज़ पहने तेज़ी से भागती हुई आई—


“धर… धर… धर…”


और अचानक एक खाली बस में चढ़ गई।


तभी उसे इस तरह बस में चढ़ती देख पीछे से किसी ने आवाज लगाई,


“अरे… अरे…! यह क्या? आप इस बस में क्यों चढ़ रही हैं? आप कौन हैं?”


वह लड़की हाँफती हुई बोली,


“जी… मैं… वहाँ… वो… मेरा नाम दामिनी है।”


वह लड़का उसे गौर से देखते हुए बोला,


“अरे! आपका चेहरा तो पूरा पसीने से तर है। ये पानी की बोतल लीजिए और थोड़ा पानी पी लीजिए।”


दामिनी हाँफते हुए बोली,


“जी, मुझे यहाँ से कहीं दूर ले चलिए। व… वे गुंडे मेरे पीछे पड़े हैं।


उस लड़के ने हैरान होते हुए पूछा,


“गुंडे…? पर क्यों? यह लोकल बस नहीं है, यह एक टूरिस्ट बस है। आप कौन हैं और कहाँ से आई हैं?”


फिर उसने आगे कहा,


“और कोई आपके पीछे क्यों पड़ेगा? मैं यहाँ का गाइड हूँ। आज मुझे सभी यात्रियों को लेकर उत्तराखंड—ऋषिकेश और हरिद्वार—की सैर पर ले जाना है। आप इस टूरिस्ट बस में बिना टिकट के नहीं चढ़ सकतीं।”


उसने परिचय देते हुए कहा,


“मेरा नाम ऋषि शर्मा है। मैं एक टूरिस्ट गाइड हूँ। "


दामिनी रोते हुए बोली,


“देखिए, अगर आप मेरी मदद करेंगे तो मेरी जान बच जाएगी। मैंने एक सुनसान रास्ते पर—जो यहाँ से लगभग पाँच किलोमीटर की दूरी पर है—किसी का खून होते हुए देखा है। इसी वजह से वे लोग मेरा पीछा कर रहे हैं।


भागते समय मेरी आईडी वहीं गिर गई थी, जिसे उन गुंडों ने देख लिया… और उन्होंने मेरा चेहरा भी पहचान लिया है। इसलिए मैं डर के मारे भागती हुई इस बस को लोकल बस समझकर अंदर आ गई।


आप मुझे देखकर अच्छे और ईमानदार लग रहे हैं। क्या आप मेरी मदद करेंगे? मैं उन गुंडों से भागते-भागते यहाँ तक आ गई हूँ, लेकिन वे मेरा पीछा नहीं छोड़ रहे हैं।


कृपया, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ। थोड़ी देर के लिए मुझे इसी बस में रहने दीजिए। इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है। मैं अनाथ हूँ। बचपन से मेरे अंकल ने ही मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया है, और अब मैं एक सोशल वर्कर बन चुकी हूँ।”


इतना कहते हुए दामिनी ने अपने पर्स से मोबाइल निकाला और वीडियो दिखाते हुए बोली,


“यह देखिए, यह वीडियो मैंने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया है। रिकॉर्ड करते समय उन्होंने मुझे देख लिया था, इसलिए मैं जान बचाकर भागती-भागती यहाँ तक पहुँच गई।”


उसके बाद वह लड़की डरते और घबराते हुए अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए वीडियो को ऋषि को दिखाने लगी।


उस वीडियो में ऋषि ने देखा कि एक गोदाम के भीतर कुछ व्यक्ति हाथों में हथियार थामे हुए थे और सामने रखे कुछ बक्सों में भरे बम-बारूद की ओर इशारा करते हुए एक व्यक्ति पर बेरहमी से चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर रहे थे।


साथ ही वे नवप्रयाग और विजयपुर के कुछ हिस्सों में 4 और 5 अक्टूबर को साजिश रचकर किसी बड़े नेता और एक हेड इंस्पेक्टर की हत्या करने की योजना बना रहे थे।


जैसे ही ऋषि ने वह वीडियो देखा, वह चौंक गया और दामिनी से बोला,


“हे भगवान! उस इंसान को कितनी बेरहमी से मारा गया है। और 4 व 5 अक्टूबर को—यानी आज से तीन दिन बाद—हत्या करने की साजिश रची गई है।


देखिए, आप चिंता मत कीजिए। मैं आपके साथ हूँ। हम दोनों मिलकर पुलिस स्टेशन चलेंगे। मैं आपको कुछ नहीं होने दूँगा।


लेकिन अभी मैं ड्यूटी पर हूँ, इसलिए ड्यूटी के समय पुलिस स्टेशन नहीं जा सकता।"


इतना सुनते ही वह लड़की ऋषि की बाँहों में बेहोश हो गई। उसे बेहोश होता देख ऋषि घबरा गया और मन ही मन बोला,


“इस लड़की को इस हालत में कैसे छोड़ दूँ…?”


इतना कहते हुए उसने जल्दी से अपनी बोतल का पानी हथेलियों में लेकर दामिनी के चेहरे पर छींटे मारे और उसे संभालते हुए उठाया। फिर वह बोला,


“मैं आपका साथ दूँगा। आप इस बस में बैठिए, मैं अभी आता हूँ।”


ऋषि मन ही मन सोचने लगा,


“अरे! अगर मैं अपने मालिक से इस लड़की के बारे में कहूँगा तो न जाने वह क्या सोचेंगे?


लेकिन इस लड़की की जान बचाना भी ज़रूरी है।


क्या बहाना बनाऊँ, कुछ समझ नहीं आ रहा है।


ऊपर से टूरिस्ट बस की सारी सीटें पहले ही बुक हो चुकी हैं।


तभी अचानक ट्रैवल एजेंसी के मालिक संजय ने ऑफिस के अंदर से आवाज़ लगाकर ऋषि को बुलाया।


जैसे ही ऋषि बस से उतरकर ऑफिस के अंदर गया, मालिक उससे कहने लगे,


"ऋषि, इधर आना। एक फैमिली ने अभी-अभी अपना ट्रिप कैंसिल करवा दिया है। हमारी तीन सीटें बेकार हो गईं। बस कुछ ही देर में तुम टूरिस्ट बस लेकर हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए रवाना हो जाना और अच्छे से सभी यात्रियों को उन जगहों की सैर करा देना। एक भी शिकायत नहीं आनी चाहिए।"


इतना सुनते ही ऋषि मन ही मन कहने लगा,


"अरे वाह! भगवान ने मेरी सुन ली। अच्छा हुआ कि उस फैमिली ने अपना ट्रिप कैंसिल कर दिया। अब मैं इन सीटों पर उस लड़की को बैठा दूँगा।


लेकिन पता नहीं उसके पास इतने पैसे होंगे या नहीं?


और मैं क्या बहाना बनाऊँ? कुछ समझ ही नहीं आ रहा है।"


तभी अचानक उसके मन में एक ख्याल आया और वह अपने मालिक से कहने लगा,


‘सर, आप रुकिए, मैं अभी आ रहा हूँ।’


इतना कहकर ऋषि भागते हुए टूरिस्ट बस में चढ़ गया और दामिनी से बोला,


‘क्या आपके मोबाइल में किसी पुलिस इंस्पेक्टर का फोन नंबर है? “


घबराई हुई दामिनी ने धीरे से आगे-पीछे अपनी नज़रें दौड़ाते हुए कहा,


‘मेरे पास किसी भी पुलिस वाले का नंबर नहीं है और मैं यह वीडियो किसी और को भी नहीं दे सकती। देखिए, मेरे मोबाइल की बैटरी भी खत्म होने वाली है।’


उस वक्त दामिनी के पैर लड़खड़ा रहे थे।


तब कुछ सोचते हुए ऋषि बोला,


‘अगर मैं जैसा बोलूँ, क्या आप वैसा करेंगी? तभी आप इस बस में चढ़ सकती हैं।"


दामिनी डरते हुए बोली,


"क्या करूँ ? मतलब… मैं समझी नहीं…?"


ऋषि बोला,


"आप मुझ पर भरोसा रखिए। मैं कोई गलत इंसान नहीं हूँ। आप बिल्कुल भी मत डरिए। आपको मेरे मालिक को कहना होगा कि आप मेरी दोस्त हैं और मेरे साथ उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की सैर करना चाहती हैं।


टूरिस्ट बस की एक फैमिली ने अभी-अभी अपनी ट्रिप कैंसिल कर दी है, इसलिए बस में बैठने के लिए आपको जगह मिल जाएगी। मैं अपनी तरफ से आपके सभी पैसे चुकता कर दूँगा।


अगर हम इस एरिया से निकल गए, तो वे गुंडे आपको ढूँढ़ नहीं पाएँगे। फिलहाल यही एक उपाय है। अगर आपको मंज़ूर हो, तो बताइए।


वैसे भी, मैं एक टूरिस्ट गाइड हूँ। मेरा फ़र्ज़ है कि सभी यात्रियों को अच्छे से हर जगह की सैर कराऊँ और उन्हें सुरक्षित उनकी मंज़िल तक पहुँचाऊँ। इसी बहाने आपकी भी उत्तराखंड की सैर हो जाएगी।


और आपके पास वीडियो भी है, इसलिए डरने की कोई ज़रूरत नहीं।”


तभी दामिनी की नज़र पीछे पड़ी। उसने देखा कि कुछ ही दूरी पर गुंडे अपनी कार के पास खड़े थे और हर दुकान में जाकर एक लड़की के बारे में पूछताछ कर रहे थे।


इतने में, दोनों ने देखा कि गुंडे पास ही खड़े एक ऑटो वाले से कड़क स्वर में पूछ रहे थे,


“क्या यहाँ किसी लड़की को आते हुए देखा है?”


ऑटो वाला “नहीं” कहते हुए गली के अंदर चला गया।


यह देखकर दामिनी झट से बस में झुक गई और ऋषि से फुसफुसाते हुए बोली,


“वह देखिए… वे वही गुंडे हैं। आपकी बातें मुझे सही लगीं। बस, इन लोगों से मुझे बचा लीजिए। यह सबूत पुलिस को देना मेरे लिए बहुत ज़रूरी है। मैं एक सोशल वर्कर हूँ।”


“ठीक है,” कहकर ऋषि अपने मालिक के पास गया और बोला,


“संजय सर, मेरी एक दोस्त अभी-अभी आई है। वह भी उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की सैर करना चाहती है। कृपया उसका टिकट बुक कर दीजिए।”


ट्रैवल एजेंसी के मालिक संजय ने कहा,


“अरे! यह तो बहुत अच्छी बात है। क्या नाम है उसका? उसे यहाँ बुलाइए।”


“ठीक है, सर,” कहकर ऋषि दामिनी के पास गया और बोला,


“सर आपको बुला रहे हैं, आप मेरे साथ अंदर चलिए।”


दामिनी को उन गुंडों से बचना था, इसलिए उसने हाँ कर दी।


ऋषि तुरंत बस से नीचे उतरा। पास पड़ा हल्का प्लाईवुड उसने अपनी आड़ में रख लिया, ताकि दामिनी चुपचाप गुंडों की नज़रों से बचते हुए ऑफिस के अंदर जा सके।


उस वक्त हालात और मामला दोनों ही काफ़ी गंभीर नज़र आ रहे थे। अगर गुंडों की नज़र एक पल के लिए भी दामिनी पर पड़ जाती, तो वे तुरंत हमला कर देते।


ऋषि एक चौड़ी प्लाईवुड लेकर खड़ा हो गया, ताकि दामिनी उसकी आड़ में ऑफिस के अंदर जा सके।

चारों ओर नज़र दौड़ाकर दामिनी दबे पाँव टूरिस्ट बस से बाहर निकल आई।

दामिनी अपने कपड़े ठीक करते हुए प्लाईवुड की आड़ में नज़र बचाते हुए ट्रैवल एजेंसी के अंदर चली गई।



ऋषि ने दामिनी को अपनी दोस्त बताकर कुछ देर तक संजय से बातचीत की, मगर पूरी सच्चाई छिपाए रखी। वह कुछ सोच में पड़कर चुप हो गया। उसके मन में भी यही डर था कि कहीं गुंडे वहाँ तक न पहुँच जाएँ।


अंदर पहुँचकर दामिनी ने संजय से कहा,

“मेरा नाम दामिनी सिंह है। मैं उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की सैर करना चाहती हूँ। ऋषि मेरा दोस्त है। कृपया मेरा नाम यहाँ दर्ज कर दीजिए।”


उसे डर लग रहा था कि कहीं गुंडे ट्रैवल एजेंसी के ऑफिस के अंदर भी न आ जाएँ। वह भीतर ही भीतर घबराई हुई थी।


दामिनी से कुछ देर बातचीत के बाद उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की यात्रा का उसका टिकट जारी कर दिया गया। टिकट मिलने के तुरंत बाद उसने संजय जी को धन्यवाद कहा और ऑफिस से बाहर निकल गई। 


ऋषि तुरंत एक प्लाईवुड उठाकर खड़ा हो गया, ताकि दामिनी उसकी आड़ में चुपचाप बस के अंदर जा सके।


इसके बाद दामिनी नज़र बचाते हुए टूरिस्ट बस में बैठ गई।


उस वक़्त गुंडे अपनी कार में थे और उनके हाथों में पिस्तौल भी थे। वे टूरिस्ट बस के सामने आकर खड़े हो गए और चारों तरफ देखने लगे कि वह लड़की कहाँ है। दामिनी बस के सामने उन गुंडों को देखकर कांपने लगी। 


वह उनकी बातें सुन रही थी।

 गुंडे कह रहे थे,

“लगता है हमें आगे जाकर देखना होगा कि वह लड़की कहाँ है। उस लड़की को मारना जरूरी है। पूरे इलाके में अपने आदमी फैला दो।”


इसके बाद वे कार लेकर आगे बढ़ गए।



दामिनी पसीने से भीग चुकी थी। जैसे ही ऋषि वहां आया, उसने बस से थोड़ी दूर उन गुंडों को देखा। ऋषि भी गुंडों को देखकर डर गया।


दामिनी ऋषि से कहने लगी,

“अच्छा हुआ कि उन गुंडों की नजर मुझ पर नहीं पड़ी।”


तभी टूरिस्ट बस का ड्राइवर रमेश हॉर्न बजाते हुए ऋषि से बोला,

“चलो ऋषि भाई।”



ऋषि बोला, “हाँ हाँ, चलो।”


तभी अचानक वहाँ मुकेश और आकाश नाम का गाइड आ गया और कुछ देर तक ऋषि से बातचीत करता रहा। ऋषि ने जल्दी जल्दी मुकेश के हाथ में कुछ फाइलें थमा दीं, जिसके बाद मुकेश ऑफिस के अंदर चला गया। इसके बाद ऋषि और आकाश टूरिस्ट बस के अंदर आ गया।


 ड्राइवर रमेश ने उत्तराखंड जाने के लिए बस चलानी शुरू कर दी। धीरे-धीरे ऋषि विभिन्न जगहों से लोगों को टूरिस्ट बस में बैठाने लगा। कुछ ही देर में टूरिस्ट बस यात्रियों से भर गई।


दामिनी अब भी रह-रहकर खिड़की से बाहर झांककर देख रही थी कि कहीं वे गुंडे उसे देख न लें।



ऋषि बार-बार दामिनी के बारे में सोचकर चिंतित हो रहा था।



ऋषि इशारों में दामिनी से कहने लगा,

“आप चिंता मत करिए, मैं आपके साथ हूँ।”



अब यहां से दामिनी का उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की यात्रा शुरू होती है।



टूरिस्ट बस मे बैठी दामिनी मन ही मन सोचने लगी कि ऋषि गाइड कितने अच्छे हैं। उसने तय कर लिया कि यह यात्रा खत्म होते ही वह पुलिस स्टेशन चली जाएगी।


उसने मन ही मन कहा,

“हे भगवान! बस उन गुंडों से मेरा सामना न हो,” 

वह मन ही मन प्रार्थना करने लगी।


जैसे ही टूरिस्ट बस के ड्राइवर रमेश ने बस की गति धीमी की, दामिनी ने देखा कि वही गुंडे अपनी गाड़ी लेकर बस के दाईं ओर खड़े थे। ऋषि ने भी देख लिया उन गुंडो को। और फिर वह भी चिंता में पड़ गया। गुंडों को दोबारा देखकर दामिनी झट से नीचे की ओर झुक गई और मन ही मन बोली,

“हे भगवान! कहीं वे गुंडे जबरदस्ती इस बस में न आ जाएँ।”


लेकिन थोड़ी ही देर में दामिनी ने देखा कि गुंडे अपनी गाड़ी लेकर बाईं ओर मुड़ गए। यह देखकर उसके मन में थोड़ी-सी राहत मिली। इसके बाद ड्राइवर ने बस की गति तेज कर दी।



इसी बीच आकाश गाइड की तबीयत बिगड़ने लगी। उसने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और ट्रैवल एजेंसी के मालिक संजय जी से बात करने लगा।



कुछ देर बाद टूरिस्ट बस लाल किले से कुछ दूरी पर रुकी। 


वहाँ से कुछ लोग टूरिस्ट बस के अंदर चढ़ने लगे, जिनमें दो हट्टे-कट्टे व्यक्ति भी शामिल थे जो अपनी मूँछों पर हाथ फेरते हुए बस में चढ़ने लगे। उस वक्त गाइड ऋषि की नजर दामिनी पर थी। गाइड आकाश ने जल्दी-जल्दी पर्ची में उनके नाम देखे और उन्हें टूरिस्ट बस में बैठा दिया। उसके बाद आकाश सभी यात्रियों के नाम लिस्ट में लिखने लगा। 

इसके बाद वह अपनी तबीयत के बारे में ऋषि से बात कर टूरिस्ट बस से बाहर निकल गया।



वहाँ से दो लंबे, हट्टे-कट्टे कद के व्यक्ति को देखकर दामिनी कुछ पल के लिए डर गई और मन ही मन सोचने लगी,

“कहीं ये उन्हीं गुंडों के आदमी तो नहीं हैं? “


दामिनी को डरती देखकर ऋषि ने कहा,


“इस बस के यात्रियों से डरिए मत। ये सभी उत्तराखंड में ऋषिकेश और हरिद्वार घूमने जा रहे हैं। अगर आप बुरा न मानें, तो क्या मैं आपको नाम लेकर पुकार सकता हूँ?”


दामिनी बोली,


“हाँ, क्यों नहीं। आप मेरी मदद कर रहे हैं, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।"


उसके बाद ऋषि, दामिनी से हाथ मिलाते हुए कहने लगा,


“ठीक है, अब हम दोस्त बन गए।”


यह सुनकर दामिनी के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कुराहट आ गई।


उसे मुस्कुराते हुए देखकर ऋषि को भी अच्छा लगा और वह बोला,


“चलो, कम से कम आप मुस्कुराई तो।”


दामिनी कहने लगी,


“वे गुंडे मुझे अब भी ढूँढ़ रहे होंगे।”


ऋषि ने सांत्वना देते हुए कहा,


“चिंता मत करिए, आप हमारी टूरिस्ट बस में बिल्कुल सुरक्षित हैं। बस यहाँ आधे घंटे तक रुकेगी। यहीं पास में एक ढाबा है, मैं आपके लिए खाना पैक करवा कर ले आता हूँ। आप बस से बाहर मत निकलाइएगा, कहीं वे गुंडे आपको देख न लें।”


दामिनी कहने लगी, " जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। "


उसके बाद ऋषि सभी यात्रियों के नाम लिस्ट में लिखने लगा।


थोड़ी देर बाद ऋषि दामिनी के लिए खाना लाने चला गया। उसने देखा कि ढाबे के पास कई कपड़ों की दुकानें थीं। ऋषि बड़ा दयालु लड़का था। वह मन ही मन सोचने लगा,


“उस बेचारी के तो कपड़े भी गंदे हो गए हैं। मैं उसके लिए एक सेट कपड़े खरीद लेता हूँ।”


कपड़े खरीदने के बाद ऋषि बस के अंदर गया और दामिनी के हाथों में खाना का पैकेट और कपड़े पकड़ाते हुए बोला,


“यह लीजिए।”


खाने के पैकेट के साथ कुछ कपड़े देख कर दामिनी कहने लगी,


"अरे! यह क्या..? खाने के साथ तो यह कपड़े भी हैं।"


ऋषि ने कहा,


"मैंने देखा कि आपके कपड़े गंदे हो गए हैं। अगर लोग आपको देखेंगे तो क्या सोचेंगे, इसलिए मैंने आपके लिए कुछ कपड़े खरीद लिए। अगले स्टॉप पर आप चाहो तो इन्हें पहन सकती हो। हम कल सुबह तक ऋषिकेश पहुंच जाएंगे। कुछ लोग मंदिरों के दर्शन भी करेंगे, इसलिए मैंने सोचा कि आपके लिए भी कपड़े ले लूँ।"


दामिनी कहने लगी,


"आप बहुत अच्छे इंसान हैं। आप जैसा इंसान मैंने कभी नहीं देखा। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। मैं आपके पैसे लौटा दूंगी। शायद मेरे भाग में वहां के पर्यटन स्थलों की सैर करना लिखा है।"


ऋषि दामिनी की बातें सुनकर मुस्कुराने लगा।


उस टूरिस्ट बस में अलग-अलग राज्यों से लोग आकर बैठे थे। सोचते-सोचते दामिनी सो गई।


कुछ घंटों बाद जब दामिनी ने आंखें खोलीं, तो उसने देखा कि वह ऋषिकेश पहुंच चुकी है।


सुबह 5:00 बजे जैसे ही टूरिस्ट बस ऋषिकेश पहुँची, ऋषि दामिनी से बोला,


"आप खतरे से बाहर हैं। आप सभी यात्रियों के साथ-साथ ही रहिए। उन गुंडों को तो पता भी नहीं चलेगा कि आप यहाँ हैं।"


उसके बाद दामिनी टूरिस्ट बस के यात्रियों के साथ नीचे उतरी और घूमना शुरू किया।


ऋषि सारे यात्रियों से कहने लगा,


"आप लोग फ्रेश हो जाइए। उसके बाद आप जहाँ-जहाँ घूमना चाहते हैं, मैं आपको वहाँ लेकर जाऊँगा।"


कुछ देर बाद दामिनी फ्रेश होने के लिए वॉशरूम चली गई और उसने अपने कपड़े बदल लिए। दामिनी जैसे ही कपड़े बदलकर बाहर आई,


ऋषि ने कहा,


"दामिनी, आप मेरे साथ ही रहिए। अब आपको इस जगह कोई खतरा नहीं है। आप सुरक्षित हैं। जैसे ही यह ट्रिप खत्म होगा, मैं आपके साथ पुलिस स्टेशन चलूँगा।"


उसके बाद ऋषि सभी पर्यटकों को उस जगह की सैर कराने लगा। बस के कुछ यात्री दामिनी से बात करने लगे। दामिनी भी उनके साथ बातें करते हुए घूमने लगी।


दामिनी ने देखा कि आसपास के कई मंदिरों से आरती की आवाज़, घंटों की ध्वनि और शंखों की आवाज़ें आ रही थीं, जो एक पावन और असीम शांति वाले वातावरण का निर्माण कर उस जगह की पवित्रता का आभास करा रही थीं।


टूरिस्ट बस के सभी यात्रियों से ऋषि चलते-चलते कहने लगा,


"उत्तराखंड बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल ऋषिकेश को भारत के एडवेंचर स्पोर्ट्स के केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है। क्या आपको यह बात पता है?"


दामिनी कहने लगी,


"हाँ, मुझे पता है। मैं इन सब के बारे में पढ़ा करती हूँ।"


गाइड ऋषि पहाड़ों और नदियों की ओर इशारा करते हुए दामिनी से कहने लगा,


"वह देखो, वहाँ का नज़ारा कितना सुंदर लग रहा है!"


प्रकृति के नज़ारों को देखते हुए दामिनी कहने लगी,


"मुझे उगते हुए सूरज का नज़ारा देखना बहुत पसंद है।"


उसके बाद ऋषि सभी यात्रियों से कहने लगा,


"यह जगह प्राचीन और भव्य मंदिरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ विदेशों से भी बहुत-से लोग घूमने आते हैं। आइए, अब मैं आपको लक्ष्मण झूला की सैर करवाता हूँ।"


कुछ क्षणों के लिए दामिनी को वहाँ चारों ओर का नज़ारा देखकर बहुत अच्छा लगने लगा और वह बीते दिनों की बातें कुछ पल के लिए भूल गई। उसने मन ही मन कहा,


"यहाँ आते ही मुझे सुख, शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है।"


हर जगह उसे धीरे-धीरे घूमना अच्छा लगने लगा। वह खुशी-खुशी सभी जगहों की यात्रा करने लगी।


दामिनी ऋषि से बोली,


"क्या मैं कुछ देर के लिए नदी के पास जाकर खड़ी हो सकती हूँ?"


ऋषि ने कहा,


"हाँ… हाँ, क्यों नहीं?"


कुछ देर तक दामिनी नदी के पास जाकर खड़ी रही और चारों ओर का नज़ारा देखने लगी। मानो वह जगह उसे अपनी ओर आकर्षित कर रही हो। ठंडी हवा के झोंके उसके तन को शीतलता देने लगे।


दामिनी ऋषि गाइड से बोली,


"मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी यात्रा आज यहाँ के पर्यटन स्थलों की सैर में बदल जाएगी। कल का दिन मेरे लिए बहुत ही बुरा था और आज यहाँ सब कुछ बड़ा ही अजीब लग रहा है। ऐसा पहली बार मेरे साथ हुआ है। मैं सोचती थी कि यहाँ आकर पर्यटन स्थलों की सैर करूँगी और माता के दर्शन करूँगी, पर इस तरह आना होगा, यह मैंने कभी नहीं सोचा था।"


उसके बाद ऋषि यात्रियों से कहने लगा,


"चलिए, अब मैं आपको लक्ष्मण झूला की सैर करवाता हूँ।"


जब भी दामिनी रह-रहकर उन दो लोगों को देखती, तो उसे अजीब-सा महसूस होता।


चलते हुए दामिनी मन ही मन सोच रही थी—


"कहाँ से कहाँ आ गई हूँ मैं। पता नहीं जब दोबारा दिल्ली जाऊँगी तो मेरा क्या होगा? बस जैसे-तैसे मैं पुलिस स्टेशन पहुँच जाऊँ, ताकि नवप्रयाग और विजयपुर में होने वाले बम विस्फोट के बारे में पुलिस को जानकारी देकर उस हादसे को रोका जा सके।"


उस वक्त दामिनी को लक्ष्मण झूला घूमकर बहुत ही अच्छा लग रहा था।


कुछ देर बाद ऋषि गाइड सभी यात्रियों को विस्तार से समझाते हुए बोला,


"चलिए, अगर आप लोगों को भूख लगी है तो कुछ खा लीजिए।  फिर हरिद्वार के लिए निकल जाएंगे। वहाँ घूमने के बाद हम दिल्ली जाने के लिए रवाना हो जाएंगे।"


उसके बाद ऋषि ने दामिनी से कहा,


"चलिए, कुछ खा लीजिए। आपको भी तो भूख लगी होगी?"


दामिनी ने कहा,


"ठीक है, पर मेरे पास पर्स में कुछ पैसे हैं। मैं खाने के पैसे दे दूंगी। आप चिंता मत करिए।"


ऋषि ने कहा,


"ठीक है।"


तभी ऋषि को कुछ याद आया और वह दामिनी से बोला,


"आपका मोबाइल स्विच ऑफ हो चुका है। लाइए, मैं थोड़ी देर के लिए इसे चार्ज में लगा देता हूँ। “


दामिनी ने उस पर भरोसा करते हुए उसके हाथों में मोबाइल सौंप दिया और फिर ऋषि ने मोबाइल को चार्ज में लगा दिया। जब तक दामिनी का मोबाइल पूरी तरह से चार्ज नहीं हुआ, ऋषि उस पर नज़रें गड़ाए खड़ा रहा, जिसे दामिनी भी देख रही थी।


ऋषि, जो एक नेकदिल इंसान था, उसे देखकर दामिनी की आँखों में आँसू आ गए।


मोबाइल चार्ज हो जाने के बाद ऋषि ने दामिनी के हाथों में मोबाइल थमा दिया। दामिनी नम आँखों से ऋषि को देखने लगी।


उस टूरिस्ट बस के कुछ यात्रियों से दामिनी की दोस्ती हो गई। पर न जाने क्यों, वहाँ उन दो लोगों को देखकर दामिनी अजीब-सा महसूस कर रही थी। वे दोनों व्यक्ति भी दामिनी को ही देख रहे थे।


ऋषि गाइड सभी से बोला,


"अब हमें आगे बोटिंग के ज़रिए नदी पार करनी होगी। उसके बाद हम हरिद्वार जाएंगे।"


दामिनी जैसे ही बोट पर पैर रखने जा रही थी, वह फिसलने लगी। तभी ऋषि ने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे गिरने से बचा लिया। उसके बाद वह बोट में चढ़कर बैठ गई। बाकी सब भी बोट में बैठ चुके थे।


दामिनी अपने मोबाइल से वहाँ की तस्वीरें लेने लगी। तस्वीरें लेते वक़्त वह मन ही मन सोच रही थी कि चलो, इसी बहाने यहाँ का नज़ारा अपने कैमरे में कैद कर लूँ।


घूमते हुए भी दामिनी की आँखों से आँसू बह रहे थे। ऋषि भी देख रहा था कि दामिनी की आँखों में आँसू थे।


नदी पार होने के बाद वे लोग टूरिस्ट बस में बैठ गए और हरिद्वार जाने के लिए रवाना हो गए। रास्ते भर ऋषि वहाँ की हर चीज़ के बारे में बड़े ही अच्छे ढंग से वर्णन करता रहा।


कुछ देर बाद वे लोग हरिद्वार पहुँच गए। उसके बाद ऋषि वहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर सभी को करवाने लगा।


उधर वे गुंडे अपने दूसरे आदमियों से कहते हैं,


“ध्यान रहे, वह लड़की किसी भी हालत में पुलिस स्टेशन न पहुँच पाए। हमारा जो मकसद है—बेंगलुरु और तेलंगाना में होने वाली मीटिंग में बम ब्लास्ट करना—उस प्लानिंग को कोई भी न रोक पाए। यह भी पता करो कि उस लड़की ने दिल्ली पुलिस को वह वीडियो दिखाया है या नहीं। और हाँ, उसका घर कहाँ है, यह भी मालूम करो।”


उधर हरिद्वार में ऋषि सभी यात्रियों को उस जगह के बारे में बताते हुए कहने लगा,


“हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। यहाँ का शांत वातावरण देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह स्थान सभी लोगों को बहुत आकर्षित करता है।”


सभी पर्यटकों को यह स्थान बहुत ही अच्छा लगा। दामिनी भी इस जगह को देखकर खुश थी, पर कहीं-न-कहीं उसके मन में अब भी डर बना हुआ था।


दामिनी मन ही मन सोच रही थी कि अब तक तो मैं बची हुई हूँ, पर जैसे ही दिल्ली जाऊँगी, पता नहीं मेरा क्या होगा? वह तो ऋषि गाइड का ही भला हो, जो मुझे यहाँ लेकर आ गए। पता नहीं मैं दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुँच भी पाऊँगी या नहीं? कहीं वे गुंडे मुझे मार न दें।


ऋषि गाइड ने सभी से कहा,


“खूबसूरत प्राकृतिक नज़ारों के साथ भक्ति का यह मेल सचमुच अद्भुत है। शाम के समय यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है। आप लोग आगे चलिए, मैं आपको हर की पौड़ी दिखाता हूँ। यहाँ बहुत सारे सुंदर-सुंदर घाट हैं। इन घाटों से पहले गंगा जी पहाड़ियों से नीचे उतरती हुई दिखाई देती हैं। यह गंगा जी का पहला मैदानी स्थल है, जहाँ वे प्रवेश करती हैं।”



ऋषि रह-रहकर दामिनी को देख रहा था कि कहीं वह उदास तो नहीं है। वह अपने मन ही मन सोच रहा था कि पता नहीं, दामिनी जब दिल्ली जाएगी तो कहीं वे गुंडे उसे पकड़ न लें।


सभी पर्यटकों को हर की पौड़ी के दर्शन कराने के बाद वे लोग मनसा देवी मंदिर की ओर चल पड़े।


ऋषि गाइड उनसे कहने लगा,


"यह मंदिर बिल्वा शिवालिक पहाड़ियों में स्थित है। आओ, दामिनी, हम रोपवे के द्वारा मंदिर चलते हैं। वहाँ जाकर तुम मन से प्रार्थना करना। देखना, तुम्हारी सारी मनोकामना पूरी हो जाएगी।"


इसके बाद वे लोग रोपवे के द्वारा ऊपर जाने लगे।



दामिनी बोली,
"हाँ, मैंने भी इस मंदिर के बारे में सुना है। यह बहुत ही प्रचलित है। चलो, इसी बहाने माता के दर्शन हो जाएंगे। मैं पहली बार इधर आई हूँ और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"

मंदिर पहुँचने के बाद दामिनी हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगी कि उसे उन गुंडों से छुटकारा मिले और उसकी सारी समस्याएँ सुलझ जाएँ।

दामिनी मन ही मन सोच रही थी कि यहाँ का नज़ारा कितना सुंदर और अद्भुत है। काश! मेरा घर भी यहीं होता। पता नहीं, कैसे-कैसे मैं यहाँ तक आ गई। सच में, यह नज़ारा मन को छू लेने वाला है।

इसके बाद दामिनी ऋषि के साथ रोपवे के द्वारा नीचे आ गई। शाम होने ही वाली थी।



दामिनी ऋषि से बोली,
"पता नहीं, मैं यहाँ कैसे-कैसे आ गई।"

उधर गुंडे अब तक उस लड़की के घर तक नहीं पहुँचे थे।

ऋषि ने कहा,
"माता का बुलावा आएगा तो किसी भी तरह आना ही पड़ेगा। आप चिंता मत करिए, सब ठीक ही होगा।"

दामिनी ने कहा,

"हाँ, आपने यह बिल्कुल सही कहा। शायद मेरा आज यहाँ आना लिखा हुआ था। पता है, हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है।"


ऋषि ने कहा,
"हाँ, इन स्थलों के अतिरिक्त भी हरिद्वार में अनेक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं। पर समय कम होने की वजह से मैं आपको और किसी जगह पर नहीं ले जा सकता।"

इसके बाद ऋषि गाइड उस बस में आए सभी पर्यटकों से बोला,
"अब हमारा घूमने का समय खत्म हुआ। अब हमें अपनी टूरिस्ट बस में चलना चाहिए क्योंकि समय हो चुका है। हमें समय से दिल्ली पहुँचना है।"



इतना सुनते ही दामिनी डर के मारे ऋषि का हाथ पकड़ लेती थी। ऋषि समझ गया कि दामिनी अंदर ही अंदर डर रही थी।

ऋषि दुबारा दामिनी से बोला,
"आप चिंता मत करिए। मैं आपके साथ पुलिस स्टेशन जरूर जाऊँगा। मैं आपसे वादा करता हूँ।"

इतना सुनकर दामिनी खुश हो गई।

सारे लोग, जो उस टूरिस्ट बस में आए थे, वह भी बस में जाकर बैठ गए। दामिनी भी अपनी सीट में जाकर बैठ गई।

तभी अचानक ऋषि दूसरी तरफ मुड़कर देखता है कि वे दो लोग अपनी सीट पर नहीं थे। ऋषि बस से उतरकर उन लोगों को ढूँढने लगा। पीछे मुड़कर उसने देखा कि दोनों व्यक्ति मिल गए थे।

ऋषि उन लोगों से कहने लगा,

"सर, आप दोनों जल्दी आइए। समय निकल रहा है। हमें वापस लौटना है।"



उन दोनों में से एक व्यक्ति ने कहा,
"क्या करें भाई साहब, इतने सालों के बाद हम यहाँ आए हैं, इसलिए यहाँ से जाने का मन ही नहीं कर रहा है। यह जगह इतनी सुंदर और आकर्षक है कि पूछिए मत। मन करता है कि यहीं रुक जाऊँ और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को हमेशा निहारता रहूँ।"

ऋषि उनसे बोला,

"जी, यह बात तो है। अच्छा, आप दोनों अब जल्दी से अंदर आ जाइए।"



इतना कहकर ऋषि टूरिस्ट बस के अंदर चला गया। वे दोनों व्यक्ति भागते हुए बस में चढ़ गए। तभी अचानक उनके पॉकेट से उनका पर्स दामिनी के पैरों के पास गिर पड़ा।

जैसे ही दामिनी की नजर उनके पर्स पर पड़ी, वह चौंक कर खड़ी हो गई और टूरिस्ट बस में चिल्लाते हुए कहने लगी,
"अरे! आप तो दिल्ली पुलिस वाले हैं!"

वे दोनों अनजान लोग एक-दूसरे को आश्चर्य से देखने लगे।



उसमें से एक व्यक्ति ने कहा,
"हाँ, हम दोनों तो दिल्ली पुलिस से हैं। क्यों? क्या बात है? आप इस तरह से मेरे पर्स को देखकर क्यों चौंक गईं?"

उन दोनों पुलिस वालों के सामने दामिनी दोनों हाथों से अपना चेहरा ढककर रोने लगी। उसे रोती देख ऋषि, दामिनी को चुप कराने लगा।

सारे टूरिस्ट बस के यात्री दामिनी को आश्चर्य से देखने लगे। ड्राइवर भी पीछे मुड़कर देखने लगा कि यह लड़की अचानक क्यों रोने लगी।

दोनों पुलिस में से एक ने कहा,

"देखिए, मेरा नाम राज राठौर है और इन्हें विनय रावत कहते हैं। हम दोनों दिल्ली पुलिस से हैं। यह देखिए मेरी आईडी। आप रो क्यों रही हैं? क्या आप हमें अपनी समस्या बताएंगी?"



दामिनी रोते हुए दोनों पुलिसवालों से कहने लगी,


"मैं कल, जब अपनी ड्यूटी करके घर लौट रही थी, तो मैंने एक सुनसान रास्ते के पास बने गोदाम में देखा कि कुछ गुंडे एक व्यक्ति के पेट में चाकू मारकर उसके पैसे लूट रहे थे। वे ड्रग्स के साथ-साथ बम विस्फोट की बातें भी कर रहे थे। वे कह रहे थे कि 4 और 5 अक्टूबर को तेलंगाना के ओबीसी फील्ड और बेंगलुरु के ए. के. फील्ड में विस्फोट किए जाएंगे।


जब मुझे उस व्यक्ति की चीख सुनाई दी, तो मैं पास के गोदाम के पीछे खड़ी होकर उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगी। तभी उन गुंडों ने मुझे देख लिया। मैं वहाँ से भागते-भागते, जैसे-तैसे अपनी जान बचाते हुए ऋषि जी की टूरिस्ट बस में आकर छिप गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ।"


इतना कहते ही दामिनी रोने लगी। ऋषि उसे चुप कराने लगा।


दामिनी की बात सुनकर दोनों पुलिस वाले चौंक गए।


ऋषि पुलिस वालों से बोला,


"दामिनी ने मुझे यह बात उसी वक्त बता दी थी। दामिनी के मोबाइल में उस मर्डर की रिकॉर्डिंग है। रुकिए, सर, मैं अभी आपको वह रिकॉर्डिंग दिखाता हूँ।"


टूरिस्ट बस के सभी यात्री यह बात सुनकर चौंक गए।


दामिनी ने उन्हें अपने मोबाइल में सारी रिकॉर्डिंग्स दिखाईं। वीडियो देखकर पुलिस वाले भी चौंक गए।


वीडियो देखते ही राज राठोर कहने लगे,


"ओह माय गॉड! इस वीडियो के ज़रिए हम उन गुंडों को पकड़ सकते हैं। यह तो बहुत बड़ा सबूत है। लगता है आप सुरक्षित नहीं हैं। अगर आप दिल्ली जाएँगी, तो वे दोबारा आप पर हमला कर सकते हैं।"


दामिनी बोली,


"वह तो अच्छा हुआ कि मेरी नज़र आपके पर्स पर पड़ी, वरना न जाने दिल्ली जाकर मेरा क्या होता। शायद वे गुंडे मुझे पुलिस तक पहुँचने ही नहीं देते। यह तो अच्छा हुआ कि ऋषि जी मुझे यहाँ लेकर आ गए। अब भी वे गुंडे मुझे ढूँढ ही रहे होंगे। प्लीज़, आप मेरी मदद करिए। आप जैसे भी हो सके, उन गुंडों को पकड़ लीजिए। नहीं तो वे मुझे मार देंगे।"


टूरिस्ट बस का ड्राइवर भी यह सुनकर दंग रह गया।


पुलिस वालों ने ड्राइवर से कहा,


"तुम गाड़ी चलाओ। समय निकलता जा रहा है।


सूरज डूबने को था।


राज राठौर ने दामिनी से कहा,


“तुम्हें कुछ नहीं होगा। ऋषि, आपने बहुत ही समझदारी का काम किया कि इस लड़की को अपने साथ यहाँ ले आए, नहीं तो अभी तक वे गुंडे इसे मार चुके होते। शाबाश। और मिस दामिनी, आपने खून होते हुए जो वीडियो बनाया है, वह मेरे मोबाइल पर भेज दीजिए। मैं अभी आपको अपना नंबर दे देता हूँ।”


दामिनी ने पुलिस के मोबाइल नंबर पर वीडियो भेज दिया।


इसके बाद ड्राइवर ने बस चलाना शुरू किया। सभी यात्री दामिनी को निहार रहे थे।


पुलिस की बातें सुनकर दामिनी को अब राहत मिली।


विनय रावत बस में चलते हुए बोले,


“हमें कुछ दिनों के लिए छुट्टी मिली थी, इसलिए हम दोनों यहाँ पर्यटन स्थलों की सैर करने आ गए। पर आपसे इस तरह मुलाक़ात होगी, यह नहीं सोचा था। देखिए, आप डरिए मत, बिल्कुल निश्चिंत रहिए। जब तक हम उन गुंडों को नहीं पकड़ लेते, आप हमारी निगरानी में ही रहेंगी।”


पुलिस वालों की बातें सुनकर ऋषि खुश हो गया।


ऋषि खुश होते हुए दामिनी से बोला,


“देखिए दामिनी, अब आपकी सारी समस्याओं का हल हो जाएगा। अब चिंता की कोई बात नहीं है।”


दामिनी मन ही मन सोचने लगी,


“मैंने तो मनसा माता के सामने यही प्रार्थना की थी, और मेरी प्रार्थना स्वीकार भी हो गई। यहाँ के पर्यटन स्थलों की सैर करना मेरे लिए अच्छा रहा। यह यात्रा मुझे ज़िंदगी भर याद रहेगी।"


दोनों दिल्ली पुलिसकर्मियों ने फटाफट आईपीएस ऑफिसर मेहता को फोन करके सारी बातें बता दीं। यह सुनकर वह भी दंग रह गए।


बस में राज राठौड़ कहने लगे,


“देखिए, मिस दामिनी, आप बिल्कुल चिंता मत करिए। आप जहाँ रहती हैं, मैं वहाँ पूरी तरह कड़ी सुरक्षा लगवा दूँगा। जब तक वे गुंडे न मिल जाएँ। और अगर गुंडे आपके घर तक आते भी हैं, तो उससे पहले ही हमारी पुलिस टीम वहाँ पहुँचकर उन्हें अरेस्ट कर लेगी।”


कुछ घंटों बाद टूरिस्ट बस दिल्ली पहुँच गई। दामिनी, ऋषि और दो पुलिसकर्मी बस से नीचे उतरे।


जैसे ही ड्राइवर ने ट्रैवल एजेंसी के मालिक को सारी बातें बताईं,


तब ट्रैवल एजेंसी के मालिक संजय ने ऋषि से कहा,


“ऋषि, यह मैं ड्राइवर से क्या सुन रहा हूँ? उस लड़की की वजह से सारे यात्रियों को भी खतरा हो सकता था…”


ऋषि अपने मालिक संजय को समझाते हुए बोला,


“सर, उस लड़की की जान बचाना बहुत ज़रूरी था। अगर उस वक्त मैं उसे बस से नीचे उतार देता, तो वे गुंडे उसे गोली मारकर भाग जाते। दुनिया में न जाने कितने लोग मुसीबत में दूसरों से मदद माँगते हैं। सर, मैंने तो बस अपना फ़र्ज़ पूरा किया है।”


ट्रैवल एजेंसी के मालिक संजय कुछ देर सोचने के बाद कहने लगे,


“हम्म… तुम्हारा विचार बिल्कुल सही था। नहीं तो न जाने उस लड़की के साथ क्या हादसा हो जाता। I’m proud of you.”


ऋषि ने मुस्कुराते हुए कहा,


“अच्छा सर, अब मैं चलता हूँ।”


ऑफिस से निकलने के बाद ऋषि दामिनी से कहने लगा,


“चलिए, मैं आपको आपके घर तक पहुँचा देता हूँ। पुलिस भी हमारे साथ ही रहेगी।”


राज राठौड़ ने कहा,


“ऋषि जी बिल्कुल सही कह रहे हैं। देखिए, मिस दामिनी, आप बिल्कुल भी चिंता न करें। आपके घर के चारों तरफ हमने टाइट सिक्योरिटी लगाने के निर्देश दे दिए हैं। अब तक पुलिस बल ने आपके घर को घेर लिया होगा। जैसे ही वे गुंडे आपके घर तक पहुँचेंगे, पुलिसकर्मी उन्हें पकड़ लेंगे। यह बात मैं दावे के साथ कहता हूँ। जानकारी मिलते ही मैं आपको ख़बर ज़रूर कर दूँगा।”


दामिनी पुलिस वालों से बोली,


“थैंक यू सो मच, सर। मुझे आप पर पूरा भरोसा है कि आप उन गुंडों को बहुत जल्द पकड़ लेंगे। और मैं गवाही देने के लिए तैयार हूँ।”


उसके बाद दामिनी, ऋषि के साथ अपने घर चली गई। दामिनी के मन में राहत मिली। घर के अंदर दामिनी, ऋषि के साथ चुपचाप सोफ़े पर बैठी हुई थी, जबकि पुलिस बल पेड़ के पीछे छिपकर गुंडों के आने का इंतज़ार कर रहा था।


उसी रात 12 बजे जैसे ही चारों गुंडे दामिनी के घर पहुँचे, उससे पहले ही वहाँ पुलिस बल पहुँच चुका था और पुलिस उन्हें पकड़ने में कामयाब हो गई।


पुलिस द्वारा गुंडों को पकड़े जाते देख दामिनी और ऋषि के मन में शांति मिली। उसके बाद ऋषि भी अपने घर चला गया।



अब दामिनी के मन में बस यही चिंता थी कि चार और पाँच अक्टूबर को होने वाले हादसों को पुलिस समय रहते तुरंत रोक पाए।


सारी खबर जानने, सुनने और वीडियो देखने के बाद, आईपीएस ऑफिसर मेहता ने तुरंत नवप्रयाग के पुलिस स्टेशन में फोन लगाया।


“हेलो, इंस्पेक्टर गोविंद बोल रहे हैं,” उधर से जवाब आया।


आईपीएस मेहता ने धीरे-धीरे फोन पर सब कुछ समझाया। यह सुनते ही नवप्रयाग पुलिस स्टेशन में मौजूद इंस्पेक्टर गोविंद के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह चौंकते हुए बोले, “आप क्या कह रहे हैं?”


दामिनी नाम की लड़की ने इसे अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया है। मैं आपको अभी वह वीडियो भेज रहा हूँ, लेकिन यह बात फिलहाल गुप्त रहनी चाहिए। आप आज से ही उसे उस जगह पर अपने पुलिस कर्मियों के माध्यम से निगरानी में रखें। किसी को भी नुकसान नहीं होना चाहिए,”  ऑफिसर मेहता ने कहा।


"ठीक है, सर। हम अभी से सतर्क रहेंगे और अपनी पुलिस टीम को यह बात बता देंगे। आप मुझे तुरंत वह वीडियो भेज दें,” नवप्रयाग पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर गोविंद ने घबराते हुए कहा।


मेहता सर वीडियो भेजकर इसकी जानकारी दे देते हैं। साथ ही, वह उस मीटिंग को होने से रोकने का ऐलान करते हैं और ओबीसी तथा ए. के फील्ड में पहले से ही गुप्त तरीकों से पुलिस को निगरानी रखने के आदेश देते हैं।


उसके बाद उन्होंने विजयपुर के पुलिस स्टेशन में फोन करके इंस्पेक्टर चोपड़ा को सारी जानकारी दी।


विजयपुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर चोपड़ा ने भी उनसे बातचीत के बाद तुरंत गुप्त रूप से कार्रवाई करने का ऐलान किया।


इससे बम ब्लास्ट को रोकने की संभावना बनी और गुंडों को रंगे हाथों पकड़ने का मौका भी मिल सका।


उसके बाद इंस्पेक्टर चोपड़ा ने इंस्पेक्टर गोविंद से फोन पर बात करके अक्टूबर 4 और 5 को होने वाले हादसों को रोकने के सारे निर्णय गुप्त रूप से तय कर लिए।


गुंडे इस बात से बेखबर थे कि विजयपुर और नवप्रयाग के पुलिस स्टेशनों में यह जानकारी पहले ही मिल चुकी थी।


पुलिस ने इस बात को गुप्त रखा। गुंडों को बस यही पता था कि चार और पांच तारीख़ को बैठक होगी और उन्हें अपना काम पूरा करना है।


लेकिन अक्टूबर की चार और पांच तारीख़ को होने वाली भयंकर अपराध की योजना को पुलिस ने समय रहते रोक दिया। जो भी इस योजना में शामिल थे, उन्हें इंस्पेक्टर बड़ी ही आसानी से गिरफ्तार कर लिया।


यह खबर पूरी मीडिया और अखबारों में आग की तरह फैल गई।


एक हफ्ते के बाद, पुलिस ने उस वीडियो की मदद से बाकी गुंडों को भी पकड़ लिया।


दोनों पुलिस ने मिलकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।


उसके बाद विनय रावत ने दामिनी को फोन किया।


जैसे ही दामिनी ने फ़ोन उठाया, विनय रावत ने फोन पर कहा,


“मिस दामिनी, बधाई हो ! हमने उन गुंडों का पता लगा लिया है। हमारे पुलिस फोर्स ने उन्हें पकड़ लिया है। अब आपको किसी भी चीज़ का खतरा नहीं है। उनका अड्डा कहाँ-कहाँ तक फैला हुआ था, यह भी हमें पता चल गया।


आप बेहिचक कहीं भी आ-जा सकती हैं। आपकी वजह से हमने ड्रग डीलरों को भी पकड़ लिया। वे गुंडे ड्रग्स बेचते थे। यह बहुत ही बड़ा केस हमारे हाथ लगा है।


अगर यह वीडियो हमें नहीं मिलता, तो पहले ही बम ब्लास्ट हो चुका होता और कई लीडर और पुलिस वाले मारे जाते।


धन्यवाद, दामिनी जी। हमें आप जैसे भारतीय नागरिकों की हमेशा जरूरत है। हमारी पुलिस टीम हमेशा आपकी मदद के लिए तत्पर रहेगी। जय हिंद!”


दामिनी खुशी से बोली, “वेलकम, सर।”


अब दामिनी खतरे से बाहर थी। उसने यह बात ऋषि को फोन करके बता दी। ऋषि भी इस खबर से बहुत खुश हुआ।


कुछ दिनों बाद ऋषि दामिनी से मिलने उसके घर गया।


जैसे ही उसने दरवाजे की घंटी बजाई, दामिनी ने दरवाजा खोला और ऋषि को देखकर मुस्कुरा दी। उसने उसे अंदर आने के लिए कहा। ऋषि अंदर गया और सोफे पर बैठ गया।


कुछ देर तक बातचीत करने के बाद दामिनी ने उसे चाय और नाश्ता कराया।


ऋषि बोला,


“आखिरकार आपकी मेहनत रंग लाई। पुलिस ने उन गुंडों को गिरफ्तार कर ही लिया।”


इतने में दामिनी ने कहा,


“हाँ, आज अगर मैं सुरक्षित हूँ, तो केवल आपकी वजह से। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप जैसा इंसान हर कोई हो। आपका एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी।”


ऋषि बोला,


“शुक्रिया, दामिनी जी। अच्छा, तो आपके अंकल कहाँ हैं? दिखाई नहीं दे रहे हैं?”


दामिनी मुस्कुराते हुए बोली,


“वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। मैं अकेली रह गई हूँ। वैसे, अब जब हम दोस्त बन ही गए हैं, तो मैं सोच रही थी कि कुछ दिनों बाद ताजमहल घूमने जाऊँ। क्या आप मुझे वहाँ का नज़ारा दिखाना चाहेंगे?”


ऋषि खुशी से बोला,


“हाँ, क्यों नहीं। मेरा तो काम ही है लोगों को अलग-अलग पर्यटन स्थलों की सैर कराना।”


इसके बाद दामिनी ने ऋषि को “धन्यवाद” कहते हुए वे पैसे दे दिए, जो ऋषि ने उसके ऊपर खर्च किए थे।


ऋषि बोला,


“ठीक है, आप तैयार रहिए। मैं आपको ज़रूर ताजमहल घुमाऊँगा। अच्छा, तो मैं अब चलता हूँ।”


दामिनी खुशी से बोली, “हाँ, बिल्कुल।”


कुछ दिनों बाद दामिनी, ऋषि के साथ—जो उसका गाइड था—ताजमहल देखने के लिए निकल गई। ताजमहल पहुँचने के बाद दोनों वहाँ घूमने लगे।


आखिरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले बम ब्लास्ट जैसे षड्यंत्र जो नवप्रयाग और विययपुर मे होने वालें थे, को नाकाम करने में दामिनी और ऋषि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


*** समाप्त ***


लेखिका सोनम शर्मा ✍️




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