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Riya yogi

Drama


4.5  

Riya yogi

Drama


तेजाब एक सोच

तेजाब एक सोच

7 mins 122 7 mins 122

नमस्कार दोस्तों, आज एक कहानी का अंक आपके सामने प्रस्तुत करने जा रही हूँ, कहने को मेरी कहानी काल्पनिक है, लेकिन कही न कही ये वास्तविकता से बहुत सबंध रखती है आप सभी से निवेदन है कि आप सब एक बार कहानी जरूर पढ़े और विचार करें कि क्या इसके तथ्य सही है या नहीं .........


क्या कभी अपने सोचा है चंद रुपए में बिकने वाला तेजाब कुछ ही पल में पूरी जिंदगी बर्बाद कर देता है "ऐसा ही हमारे विचार है जो कहने को तो महज लफ्ज है "लेकिन कब किस पर किस तरह प्रहार कर जाये कुछ कहा नहीं जा सकता ? कभी बैठकर सोचियेगा की क्या नारी की किस्मत रचने का हक़ क्या पुरुषो को ही है ?

और ये हक़ उन्हें दिया किसने है? अगर नारी चाहे तो सारे हक़ उनसे छीन सकती है लेकिन वो ऐसा नहीं करती है फिर क्यों उस पर ही सवाल?? क्यों उसका ही निरादर? जबकि एक पुरुष की काया को जन्म देने वाली भी नारी ही है फिर क्यों समाज में उससे भेदभाव ?..........कई अनगिनत प्रश्न है ?  

क्यों बार- बार उसके मना किये जाने पर भी उस की अस्मिता  वार, क्या नारी कोई वस्तु है ? जिसे जब चाहा इस्तेमाल किया और फेंक दिया !

क्या उसकी अपनी कोई आकांक्षा या अभिलाषा नहीं है ? उसे अपने तौर तरीके से जीवन व्यतीत करने का हक़ नहीं है,अपने लिए लड़ने का हक़ नहीं है 

बस हर तरफ उसी का तिरस्कार क्यों ? कभी सोचना क्या हमारी यही सोच भी कही तेजाब का काम तो नहीं करती...... 

तेजाब तो चंद पलों में किसी की काया को जलाता है, लेकिन हमारे विचार तो पल पल उसे अंदर ही अंदर जलाते रहते है ......


मेरा नाम रागिनी है और आज मैं बहुत खुश हूँ ,आज मेरा १२ वीं का परिणाम आया है मैंने ९०% अंक प्राप्त किये है | अब आगे मैं डॉक्टर बनना चाहती हूँ |मेरे परिवार वाले भी बहुत खुश है और अब मैं बहार जाकर पढ़ना चाहती हूँ, सभी लोग चाहते की मैं आगे और पढाई करू, पर मेरे पिताजी नहीं चाहते की मैं 

अब आगे पढु- ?? वे चाहते है कि जल्द मेरी शादी हो जाये वे कहते है, की मैं अब बड़ी हो गयी हूँ और मेरी सारी सहेलियों की भी शादी हो गयी है,तो मैं भी शादी कर लूँ।

क्या यह सही है? क्या मैं अपने सपनो को भूल जाऊंं ? क्या मुझे अपनी कोई ख्वाइश पूरी करने का हक़ नहीं?(23/05/2014)


 तभी आवाज आयी-" बेटा रागिनी सुनती हो कहाँ हो तुम "? (रागिनी की माँ की आवाज)

 मैंने जवाब दिया हाँ माँ आयी 

मैं दौड़कर माँ के पास गयी पूछा माँ क्या हुआ है ??

माँ ने कहा बेटा जरा मेरे काम में थोड़ा हाथ बटां दो मैंने कहा -ठीक है माँ


आज पापा को मनाते- मनाते बहुत दिन बीत गए अभी भी वे नहीं मानें मेरे एडमिशन का दिन नजदीक आ रहा है और मैं बेहद परेशान हूँ(09/06/2014)


आज एडमिशन का आखरीं दिन है और शाम हो चुकी है अब मेरे सपने बस सपने बनकर रह गए है मेरे कितने ख्वाब आज टूट गए है मैंने जो भी सोचा आज सब ख़त्म हो गया 

मैंने सोचा था कि मैं एक डॉक्टर बनूँगी सबका इलाज करुँगी और अपने परिवार के हर एक सपने पुरे करुँगी.... 

पर अब ऐसा कुछ होता नजर नहीं आ रहा (15/07/2014)


मुझे अपनी पढाई को छोड़े अब साल भर हो चूका है, लेकिन अब भी कही न कही लगता है, कि मुझे मेरे सपने पुरे करने चाहिए थे लेकिन कुछ रही सही कसर मेरे रिश्तेदारों ने पूरी कर दी, आज मेरी चाचा -चाची आये है कह रहे है - रागिनी बड़ी हो गयी है अब इसके भी हाथ पिले कर दिए जाये, इतने में दादी माँ कह पड़ी कि बात सही है, अब इसने पढाई भी छोड़ दी है,तो अब जल्द इसकी शादी करवा दो 

इतने में पापा बोल पड़े -

 हाँ माँ हां बिलकुल इसी साल इसकी शादी करवाएंगे 

मेरे सपने अब धीरे धीरे अब बिलकुल ही धुंधलाते नजर आ रहे है, ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने मेरे गहरे घाव् पर नमक छिड़क दिया हो....... (10/05/2015)



आज घर में सब खुश है, क्योकि अब मेरी शादी होने वाली है मैंने भी कही न कही अपनी किस्मत मानकर इस बात को स्वीकार कर लिया है 

कुछ ही दिनों में मेरी शादी है, सब बहुत खुश है और सब खुश है, तो मैं भी खुश हूँ 


आज हम सभी शापिंग के लिए जा रहे है (03/ 06/15) 

 शाम करीब ७ बजे हम लोग घर पहुंचे है अब मेरी शॉपिंग पूरी हो गयी है........ (03/ 06/15)


आज मुझे ३ साल हो चुके है मेरे सारे सपने आज भी वही खड़े है वही सारी खुशियां भी खड़ी मेरे सारे सपने सारी ख्वाइशे और यहाँ तक मेरे परिवार की खुशियां भी वही दबी रह गयी| 

पीछे से आवाज आयी रागिनी चलो डॉक्टर के पास चलना है 

मैंने कहा ठीक है........ (09/07/2018)

डॉक्टर ने कहा है, मैं अब ठीक नहीं हो सकती 

आप सोच रहे होगें मैं ऐसा क्यों कह रही हूँ .........


मुझे आज पुरे ३ साल हो गए हैएक घटना ने मेरी सारी खुशियों को नजर लगा दी है 

दरअसल जब मेरी शादी होने वाली थी उसके एक दिन पहले घटित इस घटना ने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया .......

मैं उस शाम अपने कुछ काम से बाजार गयी थी ,लेकिन मुझे भी नहीं पता था, आज मेरी किस्मत इस कदर ख़राब होगी!! 

एक लड़के ने पीछे से मुझे अवाज लगाई ........

मुझे भी नहीं पता था, वह कौन था?? मैंने उसे पहले कभी देखा नहीं था न ही कभी उससे मैं मिली थी, उसकी आवाज सुनकर जब मैं पीछे मुड़ी 

उससे मेरी थोड़ी बहस हुई फिर उसने मेरे साथ जबरदस्ती करने की कशिश की ......

मैंने उसका विरोध किया, लेकिन उसने विरोध करने पर मुझ पर तेजाब फेंक दिया, मैं भीड़ में यूँही तड़पती रही, पर किसी को मुझ पर तरस नहीं आया, मुझे अकेला देख सब विडियो बनाने लगे ......मैं उस वक्त कुछ कह पाने की अवस्था में नहीं थी, जैसे ही मेरे घर वालो को खबर लगी ,वे मुझे हॉस्पिटल ले गए मुझे ठीक होने में पूरा एक साल लगा, लेकिन आज मैं अब पहले जैसी नहीं रही और मेरी शादी भी नहीं हुई, मेरी काया अब पूरी तरह जुलस गयी है जो अब ठीक नहीं हो सकती, इसमें मेरी क्या गलती थी ,मैं तो सिर्फ अपनी रक्षा स्वयं ही कर रही थी | फिर मुझ पर ये प्रहार क्यों था, मुझे तो आज उन मूक दर्शको पर तरस आता है, जो किसी की सहायता के लिए आगे नहीं आते तो स्वयं खुद की रक्षा भी क्या करेंगे। 


मेरी जिंदगी की गाड़ी जैसे- तैसे चल रही थी लेकिन" आज पापा ने कह दिया की ये अब ठीक होने वाली नहीं है" इसे हमारे घर पर क्यों रखा जाये ??इसे कही और भेज देते है ..........मेरे आँसु तभी से नहीं रुक रहे है........ 


आज मुझे कुछ सवाल अपने पापा से करने है कि क्यों मुझे आगे पढ़ने नहीं दिया ?अगर पापा मुझे आगे पढाई करने देते तो आज मुझे किसी के साथ की जरुरत न होती मैं खुद ही काफी थी खुद के लिए आज भी मैं खुद के लिए लड़ सकती और अब भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकती लेकिन  क्यों मुझे बढ़ने नहीं दिया? क्यों मेरी सपनो की उड़ान के पंख काट दिए?? 

क्यों उन लोगो को कोई तीखा जवाब नहीं दिया? क्यों मुझे हर बार समझाते रहे ?क्यों वे एक बार अपनी गुड़िया के लिए दुनिया वालो से नहीं लड़ें?आखिर क्यों

और आज भी मेरा साथ नहीं दिया 


काश आज वो एक बार कहते कि- गुड़िया तू चिंता न कर हम सब तेरे साथ है, पर ऐसा नहीं हुआ 

मुझे बहार भेजे जाने की तैयारी है, लेकिन वे नहीं जानते की मैं अब उन पर बोझ नहीं बनकर रहना चाहती, मेरे सपनो की तरह अब मैं भी खामोश हो जाना चाहती हूँ। 



आगे मैं ये कहना चाहती हूँ की हम परियों को भी खुली हवा में साँस लेने का मौका दो, इन समाज और लोगो की बातो से ऊपर उठके एक बार अपनी बेटियों का साथ दो उन्हें उस लायक बनाओ की वे खुद अपनी परेशानी से निपट सके ,.......ये नहीं की उन पर रोक टोक लगाओ ,उन्हें सही गलत का मतलब समझाओ हर परिस्थिति से लड़ने का हौसला बँधवाओ....... नहीं तो फिर एक नयी रागिनी अपने सपनो को छोड़ करअपनी ख्वाईशो पर बंदिशे लगाकर खामोश हो जाएगी ........



एक पंक्ति अंतिम शब्दों के तौर पर उन बेटियों से कहना चाहूंगी की मैंने तो अपनी जिंदगी खत्म कर ली है ,मैं अपनों से लड़ने में असमर्थ रही ,चाह कर भी मैं अपने लिए नहीं लड़ सकी, लेकिन वे ऐसा न करे अपने हक़ के लिए लड़े ...........



कुछ पंक्तियाँ ..............

बहुत हुआ प्रपंच धरा पर धर चंडी का रूप तू 

बहुत हुए अवतार सीता से अब धर विकराल रूप तू 

देख लिया बन लक्ष्मी सा खुद को तूने 

अब बन कलिका रूप तू 

मत खुदको तू अब जलने दे 

 बन दुर्गा का रूप तू

 बन दुर्गा का रूप तू।


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