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Richa Goswami

Tragedy Action

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Richa Goswami

Tragedy Action

सुतली बॉम्ब

सुतली बॉम्ब

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दीवाली का त्योहार मुझे बहुत पसंद है, दीवाली से बहुत सारे किस्से जुड़े है। शरारत और मस्ती से भरे ,कभी कभी खतरों से भरे। कभी शरारत से मजा भी मिली कभी सजा भी मिली।

और इस शरारत में भाई का साथ हो तो डर भी थोड़ा कम हो जाता है क्योंकि जब दोनों की मिलीभगत रहती है तो कोई किसी की शिकायत नहीं करता, डांट और सजा मिलने के समय एक दूसरे को बचाते भी है। भाई-बहन की शरारत बेशुमार है और खतरनाक भी।

जब मैं 15 साल की थी। दीवाली के दौरान मैंने और भाई पटाखे फोड़ रहे थे, अचानक से मेरा दिमाग में खुराफाती आइडिया आया। जैसे ही भाई ने हरा रस्सी बॉम्ब रखा आग लगा कर मैंने जलते बॉम्ब के ऊपर स्टील का जग उल्टा करके रख दिया, जैसे ही भाई ने देखा मेरा हाथ पकड़ कर दौड़ लगा मुझे जल्दी से काफी पीछे खींच लिया, फिर मैं और भाई हाथ से कान बंद करके दीवार की आड़ में छिप जाते है।

जग हवा में धमाके के साथ बहुत ऊपर उड़ा और पड़ोसी की छत पर बिजली जैसी कड़कती आवाज के साथ गिरा।

मोहल्ले के लोग अपने घरों से बाहर आ कर देखने लगते है, पड़ोसी जिनके छत पर जग गिरा था वो बाहर निकलकर बोले - क्या हुआ तुम लोग ठीक तो हो?

और फिर मैं और भाई थोड़ा डर गए लेकिन अगले ही पल दोनों बहुत जोर से हंस पड़े और उनको बताया कि असल में क्या हुआ था। फिर पड़ोसी भी हंसते हुए बोले- ऐसी शरारत मत करो, चोट लग सकती है।

फिर मैंने भैया से कहा, एक बार फिर जग को आसमान में उड़ाते हैं, तो भाई ने कहा: नहीं इस बार मैं तुझे उड़ाऊंगा अगर तूने पटाखे पर जग रखा तो।



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