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Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

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Vimla Jain

Tragedy Action Inspirational

सफाई कर्मचारी और सहायक सहायिका

सफाई कर्मचारी और सहायक सहायिका

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बीना फोन पर

क्या बताऊं निशा मैं बहुत परेशान हो गई हूं। 

निशा क्या हो गया है।

 क्यों इतनी परेशान दिख रही है।

इतने दिन से कचरे वाला नहीं आ रहा है।

 और अभी त्यौहार के कारण मेरी बाई भी नहीं आ रही है।

 सब काम हमको हाथ से करना पड़ रहा है। और कचरे वाले यह कचरा नहीं ले जाने के कारण सब तरह कचरा ही कचरा फैला पड़ा है।

निशा बोलती है तू कचरा वाला कचरा वाला क्या कर रही है।

 कचरे वाले नहीं सफाई कर्मचारी हैं।

 अगर यह नहीं हो तो हमारे चारों तरफ सफाई कैसे रहेगी ।रोज सफाई करते हैं कचरा ले जाकर एक जगह डालते हैं।

 घर घर से कचरा इकट्ठा करते हैं तब जाकर के सफाई रहती है।

 गटर साफ करते हैं झाड़ू लगाते हैं‌

 सफाई करते हैं।

 हम लोग तो इनके काम को और बढ़ाते हैं।

 और ऊपर से इनको तरह-तरह से गलत नाम से कचरा वाला ,कचरा वाला करते रहते हैं।

 कुछ लोग तो गालियां भी निकालते हैं।

 कितना गलत है देखा जाए तो देश में हर शहर को हर जगह को साफ करने के लिए यह सफाई वाले ना हो तो कितनी गंदगी हो जाए। कभी इस बात की तरफ ध्यान दिया।

 हम लोगों को भी इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि कचरा सब तरफ ना फैलाएं। 

 यह लोग आए तो अच्छी तरह से उनसे बात करके और कचरा उनके कचरा पेटी में डालें।

 तभी सब तरफ सफाई रहेगी और यह सफाई कर्मचारी यह तो वास्तव में रियल हीरो हैं।

 इतना गंदा काम होता है उसको करते हैं हमारी गंदगी ले जाते हैं और फिर भी हम इनको गलत बोलते हैं।

बीना हां  

मेरे से गलती हो गई।

 इस तरह से तो मैंने सोचा ही नहीं। तुम सही कह रही हो यह नहीं आए तो क्या हो गया हम अपने घर का कचरा इकट्ठा करके जो कचरा पेटी पड़ी है।

 उसमें जाकर डालेंगे और इस बात का ध्यान रखेंगे। और लोगों को भी इस बात की समझ देंगे कि यह लोग हमारी मदद के लिए हैं। ये सफाई कर्मचारी हैं रियल हीरो है यह कचरे वाले नहीं है।

 यह बात तो हो गई ।

अब मैं बाई, का क्या करूं जब देखो तब छुट्टी मना जाती है।

 हर त्योहार पर छुट्टी मनाती है।

निशा

देख बीना यह लोग हमारे नौकर नहीं हैं यह लोग हमारे काम में सहायक हैं हमारे सहायक इन लोगों का भी घर परिवार होता है। इन लोगों के लिए भी त्योहार होते हैं ।

तो कभी तो इनको भी छुट्टी चाहिए ना ।

जिस दिन यह छुट्टी ले उस दिन हमको मिल बांट कर काम कर लेना चाहिए। बल्कि मैंने तो ऐसा कर रखा है मैं 2 सहायक रखती हूं। 

और बारी बारी से उनको छुट्टी देती हूं एक नहीं हो तो दूसरा उसका काम कर ले। और कभी कभी दोनों छुट्टी पर हूं तो घर वालों की मदद से बिना कोई टेंशन के सब काम को निपटा लेती हूं। हमको इन के ऊपर डिपेंड नहीं रहना चाहिए।

 अपना काम खुद करने की आदत भी रखनी पड़ेगी। यह हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा है मगर अगर हम उनके ऊपर पूरी तेरे आश्रित हो जाएंगे। तो लॉकडाउन में शुरू में जैसा हुआ था वैसा होगा।

 बाद में सब लोग अपना काम करने लगे थे ना ।वापस ऐसा ही करने का सबको अपना थोड़ा काम में मदद करने को कहने का। सब लोगों की मदद से काम को निपटाने का।

निशा बीना कुछ बात समझ में आई मेरी।

क्यों हमेशा टेंशन में घूमती रहती है ।

थोड़ी शांत और स्वस्थ रहकर टेंशन फ्री रहा कर। जिंदगी में काम तो चलते ही रहते हैं।

बीना बोलती है हां निशा इसीलिए तो मैं तेरे से बात करती हूं ।

तू मेरे को हर बात का हल निकाल कर देती है।

 वास्तव में तू सही कह रही है अब मैं इस बात का ध्यान रखूंगी ।

और सब से मदद ले लूंगी और अच्छी तरह काम करूंगी ।

हमारी जिंदगी में यह सफाई कर्मचारी हमारे काम के मददगार यह भी एक हीरो का रोल ही अदा करते हैं।

अच्छा निशा तेरा बहुत-बहुत धन्यवाद अब मैं फोन रखती हूं और अपने काम निपटाती हूं।



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