संवाद
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भावनाएं नश्वर होती हैं पर पत्र नहीं होते ।अगर आपने किसी को प्रेम पत्र लिखा और उसे भेज भी दिया तो उसके लिए आप जीवन भर जिम्मेदार होंगे भले ही प्रेम का स्रोत दो साल में ही बदल जाए। अब वह पत्र आपके लिए एक टाइमबाॅम्ब के जैसा है और आप प्राप्तकर्ता की रहमत पर हैं।और कुछ नहीं तो वह आपकी सार्वजनिक शर्मिन्दगी का कारण तो हो ही सकती है । इसलिए मैंने किसी को प्रेम पत्र नहीं भेजा और खून से तो केवल बिलकुल नहीं क्योकि केवल ब्लड ग्रुप और पत्र वही रह जाते हैं और कुछ भी नहीं ।
अब देखिये न, कुछ दिनों पहले मैंने अपने एक तथाकथित दोस्त को उधार लेकर न लौटाने के लिए एक बहुत कड़ा पत्र लिखा।
शब्दकोश से खोज खोज कर अपशब्द लिखे। और सोचा कि रजिस्ट्री कर दूँ जिससे की नहीं मिलने का बहाना नहीं बना सके।नियति का खेल देखिये कि शनिवार होने के कारण पोस्ट ऑफिस जल्दी ही बन्द हो गया ।
रविवार की सुबह उस पत्र को देख देख कर कुढ़ ही रहा था कि उसी दोस्त का फोन आया । " यार, तुम्हें ही सबसे पहले खुशखबरी दे रहा हूँ । मुझे इनकम टैक्स विभाग में बहुत ही ऊँचे पद पर नौकरी मिल गई है । मुझे पता था तुम्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी।"
"हाँ, हाँ बहुत बढ़िया, बहुत बधाई " मैने संभल कर हकलाते हुए कहा।
शुक्रगुजार हूँ जीवन में उन सभी पत्रों का जो लिखे तो पर भेजा नहीं।
