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Kalpesh Patel

Drama Romance

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Kalpesh Patel

Drama Romance

संवाद

संवाद

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संवाद.

धूप ढल चुकी थी। गाँव की पगडंडी पर शाम का नीला सन्नाटा धीरे-धीरे उतर रहा था।
सरला—जो जन्म से मूक थी—अपने छोटे से घर के बाहर बैठी रोटियाँ बेल रही थी। उसके हाथों की चाल में एक अजीब-सी लय थी; मानो हर आटा उसकी किसी अनकही भावना का आकार ले रहा हो।
पास ही, रामू सूखी लकड़ियाँ समेटकर लौट रहा था। वह भी बेहद कम बोलने वाला इंसान था—पर उसके भीतर शब्दों से अधिक भारी एक दुनिया बसती थी।
सरला को देखकर वह रोज़ की तरह ठिठक गया। सरला ने एक हल्की मुस्कान से उसका स्वागत किया—ऐसी मुस्कान, जो उसके लिए भाषा थी, संवाद थी, और शायद… प्रेम भी।
रामू ने बिना कुछ कहे लकड़ियाँ नीचे रखीं और सरला के सामने बैठ गया। दोनों के बीच एक भी शब्द नहीं था, पर उस मौन में एक गहरी गर्माहट तैर रही थी।
सरला ने उसके लिए ताज़ी रोटी और दाल परोसी। थाली लेते समय रामू की उंगलियों ने सरला के हाथ को हल्के से छू लिया। सरला का दिल ज़ोरों से धड़क उठा, पर चेहरे पर एक शांत सुकून छाया रहा।
उनका प्रेम बोलता नहीं था, पर हर दिन एक नया वाक्य रचता था—रोटी में घुली गर्माहट, पानी का गिलास आगे बढ़ाते समय काँपती उंगलियाँ, और शाम की हवा में तैरती अनकही धड़कनें।
उस रात अचानक मूसलाधार बारिश होने लगी। तेज़ हवाओं के थपेड़ों से सरला की कच्ची झोपड़ी का एक हिस्सा ढह गया। वह घबराकर बाहर निकली।
तभी अंधेरे को चीरता हुआ रामू दौड़ता हुआ आया—भीगा हुआ, हाँफता हुआ, पर उसकी आँखों में चिंता की आग जल रही थी। उसने बिना एक पल गँवाए सरला का हाथ थाम लिया और अपने सुरक्षित घर की ओर ले गया।
सरला की आँखों से आँसू छलक पड़े—कृतज्ञता के, सुरक्षा के, और उस निष्पाप प्रेम के… जो कभी शब्दों में ढाला ही नहीं गया था।
रामू ने उसके लिए सूखे कपड़े रखे, चूल्हा सुलगाया, और चुपचाप उसके पास बैठ गया। सरला ने पहली बार पूरी आस्था के साथ उसका हाथ कसकर थाम लिया। उस मौन में एक मौन स्वीकार था—एक अटूट प्रतिज्ञा।
सुबह हुई। बारिश थम चुकी थी और हवा में सोंधी मिट्टी की महक थी।
सरला ने गीली मिट्टी पर उंगलियों से कुछ उकेरा। रामू ने झुककर उसे पढ़ा। वहाँ लिखा था—

> “रहोगे?”



रामू के होठों पर एक भीनी-सी मुस्कान तैर गई। उसने सरला के हाथ पर अपनी उंगलियाँ रखीं और उसी मिट्टी पर लिख दिया—

> “हमेशा।”



दो शब्द।
दो जीवन।
और एक निशब्द प्रेम—
जो अब मिट्टी पर नहीं, दोनों के दिलों में हमेशा के लिए लिखा जा चुका था।



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