अलास्का की गर्माहट.
अलास्का की गर्माहट.
अलास्का की गर्माहट.
*दिनांक: 27 अक्टूबर*
*स्थान: एंकोरेज, अलास्का*
खिड़की के बाहर घनघोर बर्फबारी हो रही है। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर चुका है। मीलों तक फैली बर्फ की सफेद चादर और चारों ओर पसरी काली रात के बीच हमारा छोटा-सा लकड़ी का केबिन किसी अकेले दीपक की तरह चमक रहा है।
आज जिम ने मुझसे एक सवाल पूछा, जिसने मेरे भीतर दबी पुरानी यादों को फिर से जगा दिया।
“माँ, पापा हमारे घर के आँगन में क्यों नहीं आते?”
एक पल के लिए मेरी साँसें थम-सी गईं। सात साल पहले, जब जिम अभी मेरे गर्भ में था, तब उसके पिता अलास्का के इन्हीं बर्फीले पहाड़ों में एक भयंकर बर्फीले तूफान के दौरान लापता हो गए थे। उसके बाद न उनकी कोई खबर मिली, न कोई सुराग।
दुनिया की नजर में मैं एक अकेली माँ हूँ, लेकिन मेरे लिए नेन्सी का पूरा अस्तित्व मेरे नौ साल के बेटे जिम की मुस्कान में सिमटकर रह गया है।
अलास्का में जीवन आसान नहीं है। सर्दियों में दिन छोटे और रातें बेहद लंबी होती हैं। सुबह पाँच बजे उठकर लकड़ी की भट्ठी जलाना, पूरे घर को गर्म रखना और फिर जिम को स्कूल के लिए तैयार करना—यही मेरी रोजमर्रा की जिंदगी है।
लोग कहते हैं कि इतने कठोर मौसम में अकेले एक बच्चे को पालना किसी स्त्री के लिए बहुत कठिन है। लेकिन जिम की आँखों में चमकती उम्मीद मुझे कभी हारने नहीं देती। उसकी एक छोटी-सी मुस्कान मेरी सारी थकान मिटा देती है।
पिछले सप्ताह जिम को स्कूल के प्रोजेक्ट के लिए लकड़ी का एक खिलौना बनाना था। मेरे पास नया खिलौना खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। इसलिए मैंने रात देर तक जागकर लकड़ी के कुछ पुराने टुकड़ों से एक छोटी-सी व्हेल मछली तराश दी।
अगली सुबह जब मैंने जिम की आँखों में आश्चर्य और गर्व देखा, तो लगा जैसे मैंने उसे कोई साधारण खिलौना नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे अनमोल चीज दे दी हो। उस पल मुझे महसूस हुआ कि अलास्का की बर्फीली हवाएँ भी एक माँ की ममता के सामने कितनी बेबस हैं!
आज शाम अँधेरा घिरने लगा, तो जिम मेरी डायरी के एक खाली पन्ने पर कुछ बनाने लगा। मैंने उत्सुकता से उसकी ओर देखा। उसने एक बड़ी व्हेल बनाई थी, जिसके साथ एक छोटी-सी व्हेल तैर रही थी। चित्र के नीचे टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था—
**“MY SUPERHERO MOM”**
मेरी आँखें नम हो गईं। मैंने जिम को अपने सीने से लगा लिया। उस छोटे-से बच्चे ने शायद अनजाने में ही मुझे बता दिया था कि मैंने जीवन की कठिन लड़ाई में क्या पाया है।
बाहर तापमान भले ही शून्य से कई डिग्री नीचे हो, लेकिन मेरी डायरी के उस पन्ने और जिम की मौजूदगी ने मेरे हृदय में एक अनोखी गर्माहट भर दी थी।
अलास्का की रातें चाहे कितनी भी लंबी और ठंडी क्यों न हों, माँ और बेटे के प्रेम का उजाला कभी कम नहीं होता।
आज मुझे एहसास हुआ कि कभी-कभी जीवन में किसी अपने की कमी को कोई दूसरा नहीं भर सकता, लेकिन प्रेम की एक छोटी-सी किरण हमें अँधेरे में भी जीने की ताकत दे सकती है।
— **नेन्सी की डायरी से**
